MUDA जमीन घोटाला: सीएम सिद्धारमैया को राहत देने वाली बी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Amir Ahmad

26 March 2026 5:27 PM IST

  • MUDA जमीन घोटाला: सीएम सिद्धारमैया को राहत देने वाली बी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) जमीन घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाते हुए बी रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) स्वीकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।

    जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी बीएम पार्वती, रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी, भूमि मालिक देवराजु, प्रवर्तन निदेशालय और लोकायुक्त पुलिस को नोटिस जारी किया।

    यह याचिका स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर की गई, जिसमें 28 जनवरी को ट्रायल कोर्ट द्वारा लोकायुक्त पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने के आदेश को चुनौती दी गई।

    याचिकाकर्ता ने मांग की कि इस 'बी रिपोर्ट' को खारिज किया जाए और मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।

    याचिका में यह भी कहा गया कि मामले की दोबारा जांच कर नई रिपोर्ट दायर की जाए और पूरी प्रक्रिया की निगरानी हाईकोर्ट के रिटायर जज द्वारा की जाए।

    याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि एक ही लेन-देन से जुड़े मामले में जहां मुख्यमंत्री और उनके परिवार को क्लीन चिट दे दी गई, वहीं अन्य अधिकारियों के खिलाफ आगे जांच जारी रखने का निर्देश दिया गया।

    इसे उन्होंने एकल, संयुक्त आपराधिक साजिश बताते हुए कहा कि सभी पक्षों की समान रूप से जांच होनी चाहिए।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि ट्रायल कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को नजरअंदाज किया और शुरुआती चरण में ही संदेह से परे प्रमाण जैसे मानदंड लागू कर दिए जो उचित नहीं है।

    पृष्ठभूमि के अनुसार आरोप है कि 2013 में मुख्यमंत्री रहते हुए सिद्धारमैया की पत्नी ने MUDA से जमीन के बदले मुआवजे में प्लॉट की मांग की थी। बाद में नियमों में बदलाव कर 50:50 के अनुपात में प्लॉट देने का प्रावधान लागू किया गया, जिससे कथित रूप से उनके परिवार को बड़ा लाभ हुआ।

    इस मामले में पहले भी हाइकोर्ट की एक समन्वय पीठ ने टिप्पणी की थी कि इतनी बड़ी आर्थिक बढ़ोतरी (करीब 3.56 लाख से 56 करोड़ रुपये) की जांच आवश्यक है और यह समझना जरूरी है कि नियमों में बदलाव कैसे और क्यों किया गया।

    हालांकि 7 फरवरी, 2025 को हाइकोर्ट ने इस मामले की जांच को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने से इनकार किया था।

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