MUDA जमीन आवंटन मामले में ED ने खटखटाया कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा, क्लोजर रिपोर्ट को दी चुनौती
Amir Ahmad
7 April 2026 4:59 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के बहुचर्चित MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) जमीन आवंटन मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया।
ED ने लोकायुक्त पुलिस द्वारा दाखिल 'बी रिपोर्ट' को स्वीकार करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जिससे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को राहत मिली थी।
यह मामला मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती, साले मल्लिकार्जुन स्वामी, भूमि स्वामी देवराजु और पूर्व मूडा आयुक्त जी.टी. दिनेश कुमार से जुड़ा है।
आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी को लाभ पहुंचाने के लिए 14 भूखंडों का अवैध आवंटन किया गया।
इससे पहले एक RTI कार्यकर्ता ने भी हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने नोटिस जारी किया था। अब ED ने भी ट्रायल कोर्ट के 26 जनवरी के आदेश को चुनौती देते हुए आपराधिक पुनर्विचार याचिका दायर की।
ED का कहना है कि उसने अपनी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं, जिनमें उपग्रह चित्र और व्हाट्सएप संदेश शामिल हैं, जो कथित तौर पर प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन आवंटन में गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।
एजेंसी का दावा है कि उसने ये साक्ष्य लोकायुक्त पुलिस के साथ साझा भी किए, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर 'बी रिपोर्ट' दाखिल कर दी गई।
ED ने अपनी याचिका में कहा कि ट्रायल कोर्ट और जांच एजेंसी ने इन साक्ष्यों पर विचार नहीं किया, जो न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है।
मामले में यह भी आरोप है कि 1997 में जिस जमीन का मुआवजा लगभग 3.56 लाख रुपये था, वह 2021 तक बढ़कर करीब 56 करोड़ रुपये हो गया।
ED का तर्क है कि यदि मूल आपराधिक मामले को ही समाप्त कर दिया जाता है तो धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच भी प्रभावित होगी, क्योंकि यह उसी पर आधारित है।
एजेंसी ने अदालत से मांग की कि 'बी रिपोर्ट' और उसे स्वीकार करने वाला आदेश रद्द किया जाए, ताकि लोकायुक्त पुलिस मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ आगे जांच जारी रख सके।
मामले की सुनवाई आने वाले दिनों में कर्नाटक हाईकोर्ट में होने की संभावना है।

