पत्नी के निजी फोटो तक अनधिकृत पहुंच और उन्हें वायरल करने की धमकी क्रूरता: झारखंड हाइकोर्ट
Amir Ahmad
10 Jan 2026 6:28 PM IST

झारखंड हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति द्वारा पत्नी के निजी और आपत्तिजनक फोटो तक अनधिकृत रूप से पहुंच बनाना, उन्हें अपने पास सुरक्षित करना और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना क्रूरता की श्रेणी में आता है।
हाइकोर्ट ने इसे पति द्वारा पत्नी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन का गंभीर मामला बताया।
यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनाया, जिसमें पत्नी द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद की याचिका खारिज कर दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार अपीलकर्ता पत्नी और प्रतिवादी पति का विवाह 13 मार्च 2020 को धनबाद जिले के झरिया में हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। विवाह के बाद दोनों साथ रह रहे थे।
पत्नी का आरोप है कि विवाह के एक दिन बाद जब वह अपने कमरे में सो रही थी तब पति ने उसका मोबाइल फोन बिना अनुमति के खोलकर उसमें सुरक्षित कुछ निजी फोटो देख लिए जो गलती से उसके डिजिटल खाते में रह गए थे। आरोप है कि पति ने वे फोटो अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लिए और बाद में उन्हें पब्लिक प्लेटफॉर्म पर डालने की धमकी दी।
पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने उसके साथ बार-बार शारीरिक और मानसिक अत्याचार किया तथा उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला।
दूसरी ओर, पति का कहना है कि विवाह के बाद पत्नी देर रात किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करती थी और पूछताछ करने पर उसने किसी और से संबंध होने की बात स्वीकार की थी।
हाइकोर्ट ने कहा कि क्रूरता शारीरिक या मानसिक दोनों हो सकती है और इसका आकलन प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना मानसिक क्रूरता का महत्वपूर्ण आधार हो सकता है।
खंडपीठ ने पाया कि पति ने पत्नी के निजी फोटो अपने परिजनों को दिखाए जिसके कारण उसे परिवार के सामने अपमान और मानसिक पीड़ा सहनी पड़ी। अदालत ने कहा कि यह आचरण पत्नी का उसके ही पति द्वारा किया गया चरित्र हनन है।
इन तथ्यों के आधार पर हाइकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश पलटते हुए पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया और माना कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता का आधार पूरी तरह सिद्ध होता है।

