झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ऑनलाइन जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी खत्म, अब सीओ के डिजिटल साइन से ही होगा सत्यापन

Amir Ahmad

15 Jun 2026 7:06 PM IST

  • झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ऑनलाइन जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी खत्म, अब सीओ के डिजिटल साइन से ही होगा सत्यापन

    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य भर के सर्कल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फिजिकल ज़मीन रजिस्टर और राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर दिख रही एंट्रीज़ के बीच बार-बार पाई जा रही गड़बड़ियों को देखते हुए ऑनलाइन ज़मीन के रिकॉर्ड की जांच करें और उन्हें डिजिटल रूप से प्रमाणित करें।

    जस्टिस आनंद सेन की सिंगल जज बेंच, लोहरदगा ज़िले के बारीडीह गाँव में स्थित ज़मीन से जुड़े रिकॉर्ड में सुधार की मांग करने वाली राम प्रकाश भगत उर्फ राम प्रकाश उरांव की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    याचिकाकर्ता ने रजिस्टर-II, लगान रसीदों और मौजूदा सर्वे रिकॉर्ड में रैयत (ज़मीन मालिक) का नाम ठीक करने के निर्देश मांगे थे।

    उनका तर्क था कि जहाँ फिजिकल रिकॉर्ड में उनके पूर्वजों का नाम सही ढंग से दर्ज था वहीं ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ अन्य लोगों के नाम थे।

    याचिकाकर्ता के अनुसार रिविजनल सर्वे खतियान में पूर्वज का नाम सही ढंग से दर्ज था लेकिन मौजूदा सर्वे खतियान और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर रखे गए डिजिटल ज़मीन रिकॉर्ड में गलत एंट्रीज़ आ गई थीं।

    यह भी आरोप लगाया गया कि कुरु के सर्कल अधिकारी के सामने बात रखने के बावजूद सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

    याचिकाकर्ता को तीन हफ़्ते के भीतर फिर से सर्कल अधिकारी के पास जाने का निर्देश देते हुए, कोर्ट ने अधिकारी को फिजिकल रिकॉर्ड की जांच करने और गड़बड़ी पाए जाने पर ऑनलाइन एंट्रीज़ में ज़रूरी सुधार करने का निर्देश दिया।

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह पूरी प्रक्रिया बारह हफ़्तों के भीतर पूरी की जाए। हालाँकि, मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने झारखंड में ऑनलाइन ज़मीन रिकॉर्ड से जुड़ी एक बड़ी और बार-बार होने वाली समस्या पर ध्यान दिया।

    कोर्ट ने कहा,

    "मामले को समाप्त करने से पहले यह बताना ज़रूरी है कि इस कोर्ट के सामने कई ऐसी रिट याचिकाएँ आई हैं, जिनमें नागरिक/रैयत इस शिकायत के साथ कोर्ट आ रहे हैं कि झारखंड सरकार द्वारा रखे गए ज़मीन रिकॉर्ड के ऑनलाइन पोर्टल में की गई एंट्रीज़ फिजिकल रजिस्टर/रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती हैं।"

    कोर्ट ने देखा कि डिजिटल डेटा एंट्री के दौरान हुई गलतियों के कारण रैयतों के नाम, ज़मीन का रकबा, प्लॉट नंबर और अन्य विवरणों में अक्सर गड़बड़ियाँ हो जाती हैं।

    बेंच ने आगे कहा,

    इस कोर्ट का मानना है कि ऑनलाइन रजिस्टर, यानी ज़मीन का रिकॉर्ड रखने वाली डिजिटल एंट्री, फिजिकल रजिस्टर की हूबहू कॉपी होनी चाहिए।

    कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई सबूत नहीं था, जिससे पता चले कि डिजिटल पोर्टल पर दिखने से पहले रेवेन्यू अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन एंट्रीज़ की जांच या पुष्टि की जा रही थी।

    कोर्ट ने देखा कि डिजिटल एंट्रीज़ और फिजिकल रिकॉर्ड्स के मेल खाने को पक्का करने के लिए कोई सिस्टम नहीं था और न ही रेवेन्यू अधिकारियों द्वारा पुष्टि का कोई प्रमाण था।

    कोर्ट ने इस मुद्दे पर बढ़ते मुकदमों का कारण "डेटा एंट्री में मानवीय गलती" को बताया और सिस्टम में सुधार के उपाय करने का निर्देश दिया।

    इसके अनुसार कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब से ज़मीन के सभी ऑनलाइन रिकॉर्ड एंट्रीज़ की जांच और पुष्टि हर ज़िले के संबंधित सर्कल अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।

    कोर्ट ने आदेश दिया कि रजिस्टर-II और अन्य फिजिकल रिकॉर्ड्स की एंट्रीज़ को डिजिटल एंट्रीज़ से मिलाने और पुष्टि करने के बाद सर्कल अधिकारी को रिकॉर्ड्स की पुष्टि करते हुए डिजिटल हस्ताक्षर करने होंगे।

    बेंच ने कहा,

    "केवल डिजिटल हस्ताक्षर वाली प्रमाणित एंट्रीज़ ही ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई देंगी।"

    कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि डिजिटल हस्ताक्षर इस बात का सबूत होगा कि ऑनलाइन एंट्रीज़ की ठीक से पुष्टि की गई है और वे फिजिकल रिकॉर्ड्स की "हूबहू कॉपी" हैं।

    कोर्ट ने राज्य को यह भी निर्देश दिया कि अगर ज़रूरत हो तो इस सिस्टम को लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जाए।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने कहा कि पहले से अपलोड किए गए डिजिटल रिकॉर्ड्स की भी अब सर्कल अधिकारियों द्वारा जांच और पुष्टि की जानी चाहिए। ऐसी जांच के दौरान पाई गई किसी भी गड़बड़ी को तय प्रक्रिया के अनुसार तुरंत ठीक किया जाना चाहिए।

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