बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य

Amir Ahmad

4 April 2026 12:45 PM IST

  • बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य

    झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग अग्निकांड मामले की सुनवाई करते हुए राज्य में बर्न केयर सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि यदि राज्य में आधुनिक बर्न उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला स्वास्थ्य का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।

    चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो हजारीबाग में मिट्टी तेल से लगी आग की घटना से जुड़ी थी। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी और कई गंभीर रूप से झुलस गए।

    याचिकाकर्ता ने पीड़ितों के समुचित इलाज विशेष र्न यूनिट में स्थानांतरण, मुफ्त मेडिकलक सुविधा और मुआवजे की मांग की थी।

    मामले में यह सामने आया कि 2021 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित मिट्टी तेल अत्यधिक ज्वलनशील था। जांच में पाया गया कि उसका फ्लैश प्वाइंट 13.5 डिग्री सेल्सियस था, जबकि मानक 35 डिग्री होना चाहिए। इस कारण यह घरेलू उपयोग के लिए बेहद खतरनाक था। हादसे में एक बच्चे और बुजुर्ग सहित कई लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य स्थायी रूप से घायल हो गए।

    अदालत ने पाया कि हजारीबाग सदर अस्पताल में पर्याप्त बर्न केयर सुविधाएं नहीं थीं और मरीजों को आवश्यक दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के हलफनामे में भी विरोधाभास पाया। एक ओर राज्य ने दावा किया कि सभी 24 जिलों में बर्न यूनिट चालू हैं, जबकि रिकॉर्ड में केवल 22 यूनिट का ही उल्लेख था।

    अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,

    “यदि पूरे राज्य के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक बर्न केयर सुविधा मौजूद नहीं है तो जीवन और गरिमा का संवैधानिक अधिकार महज भ्रम बनकर रह जाता है।”

    मुआवजे के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि यह विवादित तथ्यों से जुड़ा विषय है। इसलिए रिट याचिका में तय नहीं किया जा सकता। हालांकि, पीड़ितों को राहत से वंचित नहीं रखा जा सकता इसलिए उन्हें पीड़ित मुआवजा योजना के तहत आवेदन करने की छूट दी गई।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को व्यापक निर्देश जारी करते हुए कहा कि 120 दिनों के भीतर सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बर्न यूनिट पूरी तरह कार्यरत की जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इन यूनिट्स में प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, आवश्यक उपकरण और दवाइयों की उपलब्धता हर समय बनी रहे।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बर्न मरीजों का इलाज सामान्य वार्ड में नहीं, बल्कि विशेष बर्न यूनिट में ही किया जाए, जहां संक्रमण नियंत्रण और अलग व्यवस्था उपलब्ध हो।

    इसके अलावा डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण के लिए 90 दिनों के भीतर विशेष कार्यक्रम चलाने, राज्य स्तर पर निगरानी समिति गठित करने और नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ितों या उनके परिजन मुआवजे के लिए संबंधित अदालत में आवेदन कर सकते हैं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उनकी मदद करेगा।

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