HP Rent Control Act। किरायेदार की मृत्यु पर केवल पत्नी को ही किरायेदारी का अधिकार, आगे उत्तराधिकार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
Amir Ahmad
10 Jan 2026 6:33 PM IST

हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद किरायेदारी का उत्तराधिकार हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण कानून के तहत निर्धारित वैधानिक क्रम के अनुसार ही होगा। अदालत ने कहा कि यदि किरायेदार की पत्नी उसकी मृत्यु के समय जीवित थी और उसके साथ निवास कर रही थी तो वही अकेली वैध उत्तराधिकारी होगी। उसके बाद किरायेदारी का अधिकार किसी अन्य कानूनी वारिस को हस्तांतरित नहीं हो सकता।
जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि जवाला देवी अपने पति की मृत्यु तक जीवित थीं और उनके साथ रह रही थीं, इसलिए किरायेदारी के उत्तराधिकार का अधिकार केवल उन्हें ही प्राप्त हुआ। कानून की व्याख्या के अनुसार यह अधिकार व्यक्तिगत होता है। ऐसे उत्तराधिकारी की मृत्यु के बाद किरायेदारी किसी अन्य कानूनी वारिस को नहीं मिलती।
मामले पृष्ठभूमि में मकान मालिकों ने शिमला के विक्ट्री टनल के समीप स्थित एक गैराज के हिस्से से किरायेदार को बेदखल करने के लिए याचिका दायर की थी। बेदखली का आधार किराए की बकाया राशि तथा बिना अनुमति किए गए निर्माण को बताया गया, जिससे संपत्ति के मूल्य और उपयोगिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
किराया नियंत्रक ने प्रारंभ में बेदखली याचिका खारिज कर दी थी लेकिन अपीलीय प्राधिकारी ने बाद में बेदखली का आदेश पारित कर दिया। इससे आहत होकर किरायेदार पक्ष ने हाइकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की।
हाइकोर्ट ने किरायेदार की इस दलील को खारिज कर दिया कि संपत्ति के राज्य द्वारा अधिग्रहण से मकान मालिक और किरायेदार का संबंध समाप्त हो गया। अदालत ने कहा कि अधिग्रहण के बाद भी मकान मालिकों को किराया दिया जाता रहा और बाद में अधिग्रहण समाप्त होने पर पक्षकारों की स्थिति पूर्ववत हो गई।
अदालत ने यह भी पाया कि परिसर में किया गया निर्माण नगर निगम की अनुमति के बिना किया गया और यह न केवल अवैध था, बल्कि एक मंजिला ढांचे पर दो अतिरिक्त मंजिलें बनाए जाने के कारण संरचना की दृष्टि से भी खतरनाक था।
लंबे समय से लंबित मुकदमे और वर्तमान बाजार दरों को ध्यान में रखते हुए हाइकोर्ट ने उपयोग और कब्जे के लिए देय शुल्क में भी भविष्य के लिए वृद्धि की। अंततः हाइकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए अपीलीय प्राधिकारी का आदेश बरकरार रखा।

