पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं रुकेगा हक, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: हिमाचल हाईकोर्ट

Amir Ahmad

8 April 2026 5:58 PM IST

  • पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं रुकेगा हक, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: हिमाचल हाईकोर्ट

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि पत्नी के पहले से विवाह होने के केवल आरोप, बिना किसी ठोस और वैध प्रमाण के उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत राहत पाने से वंचित नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में पत्नी भरण-पोषण की हकदार रहेगी।

    जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा,

    “जब पति-पत्नी के बीच विवाह स्वीकार किया गया और पहले विवाह के अस्तित्व का कोई कानूनी प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है तो शिकायत को खारिज करना उचित नहीं था।”

    मामले में पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराते हुए पति और ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और आर्थिक उपेक्षा के आरोप लगाए थे। उसने यह भी कहा कि उसे भरण-पोषण नहीं दिया गया।

    ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए शिकायत खारिज की थी कि पत्नी का पहले से विवाह था और वह विवाह खत्म हुए बिना दूसरा विवाह किया गया। हालांकि, सेशन कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए पत्नी को हर महीने 10,000 रुपये भरण-पोषण और 5,000 रुपये किराये के लिए देने का आदेश दिया था।

    इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

    हाईकोर्ट ने कहा कि जब विवाह को लेकर कोई विवाद नहीं है तो पत्नी को घरेलू हिंसा कानून के तहत राहत लेने का पूरा अधिकार है। अदालत ने यह भी माना कि पत्नी ने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ दहेज प्रताड़ना के आरोप साबित किए।

    अदालत ने यह भी पाया कि पति यह साबित नहीं कर सका कि पत्नी के पास कोई स्वतंत्र आय का स्रोत है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि पति का यह कानूनी दायित्व है कि वह पत्नी को आर्थिक सहायता प्रदान करे और घर के खर्च के लिए पर्याप्त राशि दे।

    इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पति की याचिका खारिज की और सेशन कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।

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