कैडर समाप्ति के आधार पर पात्र कर्मचारी को वर्क-चार्ज लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
Amir Ahmad
3 Jan 2026 5:28 PM IST

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी के पक्ष में वर्क-चार्ज (Work-Charged) दर्जा पाने का अधिकार पहले ही उत्पन्न हो चुका है तो बाद में वर्क-चार्ज कैडर/स्थापना को समाप्त किए जाने के आधार पर राज्य सरकार उसे उक्त लाभ से वंचित नहीं कर सकती।
जस्टिस रंजन शर्मा ने अपने फैसले में कहा,
“जब याचिकाकर्ता ने 01.01.2003 से आठ वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर वर्क-चार्ज दर्जा पाने का अधिकार अर्जित कर लिया था, तब अगस्त 2005 में वर्क-चार्ज स्थापना को समाप्त किए जाने को ऐसा आधार नहीं बनाया जा सकता, जिससे पहले से अर्जित लाभ से उसे वंचित किया जाए।"
मामला
याचिकाकर्ता भग चंद को जनवरी 1995 में हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में दैनिक वेतनभोगी बेलदार के रूप में नियुक्त किया गया।
उन्होंने 1 जनवरी, 2003 से वर्क-चार्ज दर्जा देने की मांग की, क्योंकि उस तिथि तक उन्होंने आठ वर्षों की निरंतर सेवा पूरी कर ली थी।
हालांकि उनकी सेवाएं जनवरी 2007 में नियमित की गईं, लेकिन उन्होंने यह दलील दी कि समान परिस्थितियों वाले अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पूर्व प्रभाव से वर्क-चार्ज दर्जा दिया गया और उन्हें भी समानता के आधार पर यह लाभ मिलना चाहिए।
राज्य सरकार ने यह तर्क दिया कि लोक निर्माण विभाग में वर्क-चार्ज स्थापना को अगस्त 2005 में समाप्त कर दिया गया, इसलिए याचिकाकर्ता को वर्क-चार्ज दर्जा नहीं दिया जा सकता।
हालांकि, न्यायालय ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 1995 से 2003 तक प्रत्येक वर्ष 240 दिनों से अधिक निरंतर सेवा दी थी, जिससे यह स्पष्ट है कि वह नियमानुसार पात्र था।
न्यायालय ने राज्य के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 2002 तक आठ साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली थी। इसलिए वह जनवरी 2003 से वर्क-चार्ज दर्जा पाने का हकदार बन गया था। ऐसे में 2005 में वर्क-चार्ज स्थापना की समाप्ति उसके पहले से अर्जित अधिकार को खत्म नहीं कर सकती।
अदालत ने अंततः राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जनवरी 2003 से वर्क-चार्ज दर्जा प्रदान किया जाए और उससे जुड़े सभी लाभ दिए जाएं।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके अधिकार सेवा अवधि पूर्ण होने पर पहले ही उत्पन्न हो चुके हों लेकिन प्रशासनिक फैसलों के कारण उन्हें लाभ से वंचित किया गया हो।

