कानून से स्थापित यूनिवर्सिटी की पैरा-वेटरिनरी डिग्री को राज्य की अलग मान्यता जरूरी नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट

Amir Ahmad

21 Aug 2026 5:44 PM IST

  • कानून से स्थापित यूनिवर्सिटी की पैरा-वेटरिनरी डिग्री को राज्य की अलग मान्यता जरूरी नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के तहत स्थापित यूनिवर्सिटी से हासिल पैरा-वेटरिनरी योग्यता को केवल इस आधार पर रजिस्ट्रेशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि उस यूनिवर्सिटी को राज्य सरकार से अलग से मान्यता प्राप्त नहीं है या वह हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद में रजिस्टर्ड नहीं है।

    जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद नियम 2011 के नियम 14 के उस हिस्से को असंवैधानिक और मूल कानून के विपरीत माना जिसमें ऐसी अतिरिक्त शर्तें लगाई गई थीं। कोर्ट ने संबंधित प्रावधान रद्द करते हुए राज्य परिषद को याचिकाकर्ता का रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया।

    मामला हिमाचल प्रदेश की एक निवासी महिला से जुड़ा था, जिसने पंजाब के रामपुरा फूल स्थित कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस से पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशु स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा हासिल किया। यह कॉलेज गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान यूनिवर्सिटी, लुधियाना का घटक कॉलेज है।

    डिप्लोमा पूरा करने के बाद महिला ने हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया। परिषद ने 28 जुलाई 2025 को उसका आवेदन खारिज कर दिया।

    इसके पीछे दलील दी गई कि उसकी योग्यता को हिमाचल प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है और जिस संस्थान से उसने प्रशिक्षण लिया, वह राज्य परिषद में पंजीकृत नहीं है।

    इसके बाद याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान यूनिवर्सिटी कानून के तहत स्थापित यूनिवर्सिटी है और इसलिए हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद अधिनियम, 2010 की धारा 2(जे) में दी गई मान्यता प्राप्त संस्थान की परिभाषा के दायरे में आता है। ऐसे में यूनिवर्सिटी से हासिल पैरा-वेटरिनरी योग्यता के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार से अलग से मान्यता लेना जरूरी नहीं है।

    पीठ ने राज्य सरकार और परिषद की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि विश्वविद्यालय को राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त होना या राज्य परिषद में पंजीकृत होना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि नियम मूल अधिनियम में निर्धारित शर्तों से आगे जाकर अतिरिक्त शर्तें नहीं लगा सकते।

    कोर्ट ने कहा,

    “नियम 14 का वह हिस्सा, जिसमें प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों या यूनिवर्सिटी का राज्य परिषद में रजिस्टर होना और केवल राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों को पंजीकरण के लिए पात्र बताना शामिल है। हिमाचल प्रदेश पैरा-वेटरिनरी परिषद अधिनियम, 2010 के प्रावधानों से सीधे टकराता है।

    हाईकोर्ट ने माना कि नियम 14 का संबंधित हिस्सा मूल अधिनियम के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर शर्तें निर्धारित करता है, इसलिए वह कानूनन टिक नहीं सकता।

    इसके बाद कोर्ट ने नियम 14 के विवादित हिस्से और 28 जुलाई 2025 को याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज करने वाला आदेश किया।

    हाईकोर्ट ने राज्य पैरा-वेटरिनरी परिषद को अन्य औपचारिकताएं पूरी होने की शर्त पर एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता का रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया।

    अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story