CCTV फुटेज बिना धारा 65बी प्रमाणपत्र के भी स्वीकार्य: गुजरात हाइकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक बरकरार रखी
Amir Ahmad
10 March 2026 12:27 PM IST

गुजरात हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट वैवाहिक विवादों में साक्ष्य के रूप में सीसीटीवी फुटेज को स्वीकार कर सकती है भले ही उसके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत न किया गया हो।
जस्टिस संगीता के. विशेन और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट को फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 के तहत व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जिसके तहत वे ऐसे साक्ष्य भी स्वीकार कर सकती हैं, जो सामान्यतः साक्ष्य अधिनियम के कड़े नियमों के अनुसार स्वीकार्य न हों।
अदालत ने कहा,
“धारा 14 के अनुसार पारिवारिक अदालत को ऐसे साक्ष्य स्वीकार करने की व्यापक शक्ति है, जो विवाद के प्रभावी समाधान में सहायक हों, भले ही वे साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत औपचारिक रूप से स्वीकार्य न हों।”
मामला
मामले में पति और पत्नी का विवाह 8 नवंबर 2007 को हुआ था और 27 जून 2008 को उनके एक पुत्र का जन्म हुआ। पत्नी के अनुसार समय के साथ वैवाहिक संबंध खराब हो गए और उसे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। अंततः वर्ष 2017 में दोनों अलग रहने लगे।
तलाक की कार्यवाही की मुख्य वजह मार्च 2018 की एक घटना बनी। पत्नी ने आरोप लगाया कि 7 मार्च 2018 को जब वह नडियाद रेलवे स्टेशन पर काम पर जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रही थी तब पति वहां आया और सार्वजनिक रूप से उससे झगड़ा करते हुए उस पर हमला किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि 10 मार्च, 2018 को ट्रेन में लौटते समय भी पति ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया।
इन घटनाओं के बाद पत्नी ने फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर विवाह समाप्त करने की मांग की।
फैमिली कोर्ट ने 11 अप्रैल 2019 के अपने फैसले में पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए विवाह को समाप्त कर दिया। अदालत ने माना कि पत्नी के साथ क्रूरता हुई। इसके खिलाफ पति ने हाइकोर्ट में अपील दायर की।
हाइकोर्ट की टिप्पणी
हाइकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने रेलवे स्टेशन पर हुई घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई और उसी दिन लगी चोटों के मेडिकल दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। इसके अलावा रेलवे स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज भी रिकॉर्ड में था।
अदालत ने यह भी नोट किया कि क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान पति ने उस घटना का स्पष्ट रूप से खंडन नहीं किया। उसने यह स्वीकार किया कि उसे सीसीटीवी फुटेज की डिस्क मिली थी और उसने अपने वकील के साथ उसे देखा भी था।
अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सही निष्कर्ष निकाला है।
हाइकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट द्वारा सीसीटीवी फुटेज पर भरोसा करना उचित था और तलाक का आदेश सही है। इसी आधार पर अदालत ने पति की अपील खारिज की और क्रूरता के आधार पर विवाह समाप्त करने का फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

