होमगार्ड को पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर ड्यूटी भत्ता मिले: गुजरात हाइकोर्ट

Amir Ahmad

10 March 2026 3:00 PM IST

  • होमगार्ड को पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर ड्यूटी भत्ता मिले: गुजरात हाइकोर्ट

    गुजरात हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि होमगार्ड को दिया जाने वाला ड्यूटी भत्ता बढ़ाकर पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए।

    अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार इस मामले को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

    यह आदेश जस्टिस मौलिक जे. शेलात की एकल पीठ ने पारित किया।

    अदालत ने पाया कि होमगार्ड को प्रतिदिन 450 रुपये का भत्ता दिया जाना सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के विपरीत है।

    अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ग्रहक रक्षक, होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य का उल्लेख किया। फैसले में कहा गया कि होमगार्ड को आपातकालीन स्थितियों में तैनात किया जाता है और ड्यूटी के दौरान उन्हें पुलिस कर्मियों जैसी शक्तियां भी प्राप्त होती हैं, इसलिए उन्हें ऐसा ड्यूटी भत्ता दिया जाना चाहिए, जिसका मासिक कुल पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर हो।

    अदालत ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दे चुकी है और भारत सरकार भी इसे लागू करने के लिए कह चुकी है, तब राज्य सरकार इन निर्देशों को अनदेखा नहीं कर सकती।

    मामला

    गुजरात में कार्यरत होमगार्ड कर्मियों ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने मांग की थी कि उनकी सेवाओं को सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर पुलिस कर्मियों के समान माना जाए और उन्हें उसी के अनुरूप वेतन व भत्ते दिए जाएं।

    याचिकाकर्ताओं ने गृह मंत्रालय के 20 मार्च 2020 के उस पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें सभी राज्यों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करते हुए होमगार्ड को पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर ड्यूटी भत्ता देने को कहा गया।

    याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने केवल 2 नवंबर 2022 के प्रस्ताव के जरिए दैनिक भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये कर दिया, जो पुलिस कांस्टेबल के न्यूनतम वेतन से काफी कम है।

    राज्य सरकार का पक्ष

    राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि होमगार्ड की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भत्ता पहले 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये और फिर 2022 में 450 रुपये किया गया। इसके अलावा मेडिकल हेल्प, मृत्यु मुआवजा निधि और भोजन भत्ता जैसी सुविधाएं भी दी गई।

    सरकार ने यह भी तर्क दिया कि होमगार्ड स्वैच्छिक सेवा देते हैं और उन्हें जरूरत के अनुसार बुलाया जाता है, जबकि पुलिस कर्मियों की ड्यूटी नियमित और लगातार होती है।

    अदालत की टिप्पणी

    अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना।

    जस्टिस शेलात ने कहा कि अतिरिक्त सुविधाएं देने का मतलब यह नहीं है कि राज्य होमगार्ड से कम भत्ते पर काम ले।

    अदालत ने स्पष्ट कहा,

    “राज्य सरकार भारत सरकार या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना नहीं कर सकती, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट स्वयं उन्हें संशोधित न करे।”

    हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि होमगार्ड का भत्ता बढ़ाने से इनकार करना मनमाना निर्णय है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

    अंततः अदालत ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि होमगार्ड का दैनिक भत्ता बढ़ाकर उसे राज्य के पुलिस कर्मियों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए।

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