1999 की नीति के तहत भूखंड पाने का दावा: यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से मांगा समय, अदालत ने कहा- जितनी देरी, उतना बढ़ेगा हर्जाना
Amir Ahmad
15 Jun 2026 7:27 PM IST

गुजरात हाईकोर्ट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने सरकारी भूमि से जुड़े विवाद में राज्य सरकार की नीति के तहत अपने दावे को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि वह लंबे समय तक भूमि पर कब्जे में रहे हैं तो समय बढ़ने के साथ संभावित हर्जाने की राशि भी बढ़ सकती है।
चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी एन रे की खंडपीठ यूसुफ पठान की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अगस्त 2025 के एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी। उस फैसले में अदालत ने उन्हें वडोदरा स्थित सरकारी भूमि पर अतिक्रमणकारी माना था।
सुनवाई के दौरान पठान की सीनियर एडवोकेट शालिन मेहता ने अदालत को बताया कि उन्होंने आवेदन दायर किया है और राज्य सरकार की एक नीति के तहत अपना मामला आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 की नीति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कुछ शर्तों के साथ भूखंड आवंटित किए जाने का प्रावधान है और अन्य खिलाड़ियों को भी इसका लाभ मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके मुवक्किल को भी इस नीति के तहत भूमि मिल सकती है।
इस पर हाइकोर्ट ने कहा,
“आप जितना अधिक समय लेंगे, उतना अधिक हर्जाना देना पड़ सकता है। आपने पहले ही एक अदालत में मामला हार रखा है। इसलिए इस पहलू को ध्यान में रखिए।”
अदालत ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक संबंधित भूमि पर कब्जे के दौरान यूसुफ पठान के पक्ष में कोई आवंटन आदेश मौजूद नहीं था। ऐसे में यदि भविष्य में नीति के तहत उन्हें भूमि आवंटित भी हो जाती है, तब भी उस अवधि के लिए उन्हें हर्जाना देना पड़ सकता है, जब वे बिना किसी वैध आवंटन के भूमि पर काबिज रहे।
हालांकि, पठान की ओर से कहा गया कि यदि सरकार कोई आदेश पारित करती है तो वह वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर देय राशि और अन्य शर्तों का पालन करेंगे। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।
पूरा मामला
यूसुफ पठान ने वर्ष 2012 में वडोदरा की एक भूमि के आवंटन के लिए आवेदन किया। इसके बाद भूमि के बाजार मूल्य का आकलन किया गया और बिना नीलामी के उन्हें 99 वर्ष की लीज पर भूखंड देने का प्रस्ताव विचाराधीन रहा। लेकिन जून 2024 में राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और वडोदरा नगर निगम को कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि केवल लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने से किसी व्यक्ति को सरकारी भूमि पर अधिकार नहीं मिल जाता।
अदालत ने यह भी कहा था कि किसी अवैध स्थिति को केवल इसलिए जारी नहीं रखा जा सकता, क्योंकि वह लंबे समय से चली आ रही है।
फैसले में यह भी टिप्पणी की गई कि प्रसिद्ध व्यक्तित्व और खिलाड़ी समाज के लिए आदर्श माने जाते हैं। ऐसे लोगों को कानून के पालन में विशेष छूट देना समाज में गलत संदेश भेज सकता है।

