RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

Amir Ahmad

20 May 2026 11:27 AM IST

  • RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने एक RTI आवेदक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) उपलब्ध अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध करा देता है तब आवेदक मूल दस्तावेज देने की मांग नहीं कर सकता।

    जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक ने अपने आदेश में कहा कि RTI Act के तहत लोक प्राधिकरण की जिम्मेदारी केवल उन दस्तावेजों और सूचनाओं को उपलब्ध कराने तक सीमित है, जो उसके पास उपलब्ध और सुलभ हैं।

    अदालत ने कहा,

    “जो दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के पास उपलब्ध थे, उनकी प्रतियां याचिकाकर्ता को पहले ही दी जा चुकी हैं। मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने की जिद CPIO के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।”

    हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता लगातार RTI आवेदन दाखिल करने का आदी था और उसने एक के बाद एक 25 से अधिक आवेदन दाखिल किए।

    मामला महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी, बड़ौदा में अस्थायी शिक्षण पदों पर आरक्षण नीति से जुड़ी जानकारी मांगने से संबंधित था।

    राज्य सरकार ने 22 अप्रैल 1983 को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पदों में आरक्षण को लेकर एक प्रस्ताव जारी किया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने 14 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को 11 महीने के संविदा आधार पर शिक्षण पदों पर नियुक्तियां करने और गैर-शिक्षण पदों को आउटसोर्स करने के निर्देश दिए।

    याचिकाकर्ता ने RTI Act के तहत वाणिज्य संकाय से कई जानकारियां मांगी थीं। इनमें आरक्षण के अनुसार अस्थायी शिक्षण पदों की संख्या, प्राप्त आवेदनों का विवरण, चयनित और अस्वीकृत उम्मीदवारों की सूची, चयन समिति में एससी/एसटी प्रतिनिधियों की जानकारी और अन्य रिकॉर्ड शामिल थे।

    इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की प्रचलित आरक्षण नीति और अस्थायी नियुक्तियों से संबंधित जानकारी भी मांगी थी।

    याचिकाकर्ता का आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने मनमानी और अधूरी जानकारी दी तथा संबंधित कार्यालय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। उसने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा विभाग के 3 मई 2022 के परिपत्र का पालन नहीं किया और चयनित उम्मीदवारों की सूची भी अपलोड नहीं की।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार दी जा चुकी थी और CPIO की जिम्मेदारी पूरी हो गई।

    अदालत ने कहा कि RTI Act के तहत सूचना में रिकॉर्ड, दस्तावेज, परिपत्र और अन्य सामग्री शामिल होती है, जिन्हें लोक प्राधिकरण किसी अन्य प्रचलित कानून के तहत प्राप्त कर सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मूल दस्तावेज आवेदक को सौंपना अनिवार्य हो।

    इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका निराधार बताते हुए खारिज किया।

    Next Story