पर्स में मिले 45,420 रुपये भ्रष्टाचार का सबूत नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी के खिलाफ FIR रद्द की
Amir Ahmad
28 Oct 2026 12:50 PM IST

गुजरात हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी के पर्स से छापेमारी के दौरान 45,420 रुपये मिलने के मामले में भ्रष्टाचार की FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि केवल नकदी मिलने और अधिकारी द्वारा तत्काल संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाने से भ्रष्टाचार का अपराध साबित नहीं होता। इसके लिए अभियोजन को आवश्यक कानूनी तत्वों और आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे।
जस्टिस पीएम रावल ने मामले में FIR और आरोपपत्र का अवलोकन करने के बाद कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करके भ्रष्ट या अवैध तरीके से कोई आर्थिक लाभ प्राप्त किया।
मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कुछ गुमनाम शिकायतों के आधार पर तलाशी ली थी। इस दौरान संबंधित सरकारी अधिकारी के पर्स से 45,420 रुपये मिले। हाईकोर्ट ने गौर किया कि यह कोई ऐसा मामला नहीं था, जिसमें रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया हो और अधिकारी के पास से रिश्वत की रकम बरामद हुई हो।
कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) लागू करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि सरकारी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से आर्थिक लाभ या मूल्यवान वस्तु हासिल की। इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया।
हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर भी विचार किया। कोर्ट के अनुसार, ऐसे मामले में अभियोजन को आरोपी की ज्ञात आय के स्रोतों, उसके पास मिली संपत्ति या धनराशि और दोनों के बीच अनुपातहीनता को साबित करना होता है। केवल नकदी बरामद होना अपने आप में आय से अधिक संपत्ति का प्रमाण नहीं है।
रिकॉर्ड के अनुसार, अधिकारी का वेतन और उसके पति की आय भी मामले के आकलन के लिए प्रासंगिक थी। अधिकारी के पति भी सरकारी कर्मचारी हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन को यह साबित करना था कि बरामद रकम उनकी ज्ञात आय के स्रोतों के अनुपात में नहीं थी।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायतों को बंद किए जाने से जुड़े विभागीय पत्र रिकॉर्ड पर रखे गए। ऐसे में केवल इस आधार पर कि अधिकारी मौके पर रकम के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) के तहत अपराध नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या आय से अधिक संपत्ति के अपराध के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों को साक्ष्यों के जरिए साबित करना जरूरी है। केवल नकदी की मौजूदगी और तत्काल स्पष्टीकरण की कमी के आधार पर आपराधिक मामला कायम नहीं रखा जा सकता।
इन्हीं कारणों से गुजरात हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज FIR रद्द की।

