रिश्तेदारों को शादी पसंद नहीं तो FIR के जरिए बालिग दंपती को धमका-प्रताड़ित नहीं कर सकते: गुजरात हाईकोर्ट

Amir Ahmad

11 Sept 2026 3:34 PM IST

  • रिश्तेदारों को शादी पसंद नहीं तो FIR के जरिए बालिग दंपती को धमका-प्रताड़ित नहीं कर सकते: गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी बालिग दंपती की शादी उनके रिश्तेदारों को पसंद नहीं है तो महज इस वजह से FIR दर्ज कराकर पुलिस मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए उन्हें धमकाया या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने एक विवाहित जोड़े को पुलिस सुरक्षा देते हुए निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें न तो परेशान किया जाए और न ही उनके खिलाफ किसी तरह की हिंसा होने दी जाए।

    जस्टिस एमके ठक्कर की अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक महिला के परिवार की ओर से उसके पति के खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि महिला का अपहरण नहीं हुआ, बल्कि वह अपनी इच्छा से अपने पति के साथ गई।

    आरोप लगाया गया कि महिला के परिवार के सदस्य इस रिश्ते को पसंद नहीं करते और पति को परेशान तथा प्रताड़ित करने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि उन्हें अब भी जान का खतरा है और इसी वजह से पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि इससे पहले बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। उस मामले में महिला को उसके परिवार के सदस्य अदालत के सामने लेकर आए और उनके दबाव में उसने पति के साथ जाने से इनकार किया। हालांकि, महिला की उम्र 24 वर्ष है और वर्तमान में वह अपनी इच्छा से पति के साथ रह रही है। इस आधार पर याचिकाकर्ताओं ने FIR को कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग का मामला बताया।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महिला से बातचीत की। महिला ने अदालत को बताया कि वह अपनी इच्छा से पति के साथ रह रही है और उसने यह कदम किसी दबाव में नहीं उठाया।

    इस पर जस्टिस ठक्कर ने कहा कि जब दोनों आवेदक बालिग और विवाहित हैं और उनका विवाह किसी रिश्तेदार को पसंद नहीं है, तो केवल रिश्ते से असहमति के आधार पर पुलिस मशीनरी का इस्तेमाल कर उन्हें परेशान या धमकाया नहीं जा सकता। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए इसे 5 नवंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

    हाईकोर्ट ने साथ ही संबंधित पुलिस अधीक्षक को दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दंपती या पति के रिश्तेदारों को धमकाया या परेशान न किया जाए और उनके खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा न हो। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करनी होगी।

    अदालत ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित पुलिस अधीक्षक के समक्ष आवेदन देने का निर्देश भी दिया। पुलिस अधीक्षक को महिला के ठिकाने को गोपनीय रखने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि दंपती या पति के रिश्तेदारों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

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