2013 दुष्कर्म मामले में आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से राहत नहीं, अस्थायी जमानत याचिका खारिज

Amir Ahmad

8 Sept 2026 3:56 PM IST

  • 2013 दुष्कर्म मामले में आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से राहत नहीं, अस्थायी जमानत याचिका खारिज

    गुजरात हाईकोर्ट ने 2013 के दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की 20 दिन की अस्थायी जमानत की मांग मंगलवार को खारिज की। अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके चलते याचिका पर विचार किया जाए। साथ ही अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें आसाराम की तबीयत बिगड़ने पर उसे दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की छूट दी गई।

    जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की पीठ के समक्ष आसाराम की ओर से सीनियर वकील ने दलील दी कि राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले महीने एक अन्य दुष्कर्म मामले में उसकी उम्र और 13 साल से अधिक समय से जेल में रहने को देखते हुए 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी। इसी आधार पर गुजरात में भी 20 दिन की अस्थायी जमानत मांगी गई।

    वकील ने बताया कि आसाराम को गांधीनगर में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया और इसी मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मुकदमा चला। अलग मामले में उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में दायर अपील खारिज हो चुकी है, जिसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

    बचाव पक्ष ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर करते हुए उन आधारों को खारिज किया, जिनके आधार पर संबंधित अधिकारियों ने पैरोल देने से इनकार किया। अदालत ने उन आधारों को भ्रामक और बिना किसी ठोस आधार की कल्पना बताया था। इसके बाद आसाराम ने गुजरात के अधिकारियों के समक्ष भी पैरोल के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया।

    वरिष्ठ वकील ने कहा कि वह अस्थायी जमानत के लिए किसी मेडिकल ट्रीटमेंट का आधार नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आसाराम को पहले ही मेडिकल सहायता मिल रही है और संबंधित आवेदन वहां लंबित है।

    बचाव पक्ष ने दलील दी कि यदि गुजरात हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली तो राजस्थान हाईकोर्ट का पैरोल संबंधी आदेश केवल कागज पर रह जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य या अभियोजन की ओर से आसाराम के खिलाफ कोई नई शिकायत या आपत्ति सामने नहीं आई।

    राज्य सरकार ने अस्थायी जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आसाराम केवल दूसरे हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर गुजरात हाईकोर्ट से अपनी विवेकाधीन शक्ति का इस्तेमाल करने की मांग कर रहा है। राज्य के अनुसार, अस्थायी जमानत के लिए स्वतंत्र और ठोस आधार पेश किया जाना जरूरी है।

    राज्य के वकील ने कहा कि यदि पैरोल को ही आधार बनाया जा रहा है तो पैरोल दिए जाने के वास्तविक कारणों को अदालत के सामने रखना होगा। उन्होंने कहा कि पैरोल कोई अधिकार नहीं है और अदालत की विवेकाधीन शक्ति का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब उसके लिए उचित आधार मौजूद हो।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश पर भी गौर किया। सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, जोधपुर से उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि आसाराम को उसकी बीमारियों के लिए अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे प्रशिक्षित देखभालकर्ता की चौबीसों घंटे सहायता की आवश्यकता है।

    गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 के अपने आदेश में स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने पर आसाराम को दोबारा उसके समक्ष आने की स्वतंत्रता दी है। यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के उस आदेश के बाद आया था, जिसमें उसे 20 दिन की पैरोल दी गई।

    हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अस्थायी जमानत की अर्जी पर विचार करने का कोई आधार नहीं बनता, क्योंकि स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने की स्थिति में आसाराम को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता पहले से दी गई।

    इसके साथ ही जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की पीठ ने आसाराम की अस्थायी जमानत याचिका खारिज की।

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