2013 दुष्कर्म मामले में आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट से मांगी अस्थायी जमानत, 7 सितंबर को होगी सुनवाई
Amir Ahmad
3 Sept 2026 4:15 PM IST

2013 के दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम ने गुरुवार को गुजरात हाईकोर्ट का रुख करते हुए अस्थायी जमानत की मांग की।
जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एल. एस. पीरजादा की खंडपीठ ने मामले को 7 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अलग दुष्कर्म मामले में आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी। उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के इस आदेश को भी मौजूदा मामले में ध्यान में रखा जाए।
इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि क्या वह अपने विवेकाधीन अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन परिस्थितियों पर विचार कर सकता है।
आसाराम के वकील ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट पहले भी उन्हें कई मौकों पर अस्थायी जमानत दे चुका है। उन्होंने दलील दी कि भले ही आसाराम की भौतिक हिरासत राजस्थान में है लेकिन गुजरात में उनकी कानूनी हिरासत भी बनी हुई है।
वकील ने कहा कि यदि राजस्थान के मामले में उन्हें बरी भी कर दिया जाता है तो गुजरात पुलिस उन्हें वहां से ले जाने के लिए मौजूद रहेगी। उनके मुताबिक राजस्थान स्थानांतरित किए जाने के बाद भी गुजरात में उनकी हिरासत का कानूनी संबंध बना हुआ है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,
“फर्लो कानूनी अधिकार नहीं है।”
इस पर आसाराम के वकील ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग फर्लो की नहीं बल्कि अस्थायी जमानत की। उन्होंने बताया कि गुजरात की जेल प्रशासन की ओर से कहा गया कि आसाराम को पैरोल पर रिहा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह फिलहाल गुजरात की हिरासत में नहीं हैं।
वकील ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दी गई पैरोल का लाभ तभी मिल सकेगा, जब गुजरात में लंबित मामले को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मांग का आधार मेडिकल स्थिति नहीं है, क्योंकि स्वास्थ्य के आधार पर उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अगस्त में आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी। यह राहत एक अलग दुष्कर्म मामले में मिली, जिसमें नाबालिग से दुष्कर्म के लिए उनकी सजा बरकरार रखी गई। हाईकोर्ट ने उनकी उम्र और एक अन्य दुष्कर्म मामले में 13 साल से अधिक समय जेल में बिताने के तथ्य को भी ध्यान में रखा था।
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने आसाराम को अपनी पसंद के प्रशिक्षित देखभालकर्ता की चौबीसों घंटे सेवाएं लेने की अनुमति दी थी। सजा निलंबित करने की उनकी अर्जी पर फैसला लंबित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी हालत बिगड़ने पर दोबारा अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता भी दी थी।
गुरुवार को गुजरात हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पेश होने वाले लोक अभियोजक उपलब्ध नहीं थे, क्योंकि उनकी तबीयत खराब थी। इसके बाद राज्य की ओर से समय मांगा गया।
कोर्ट ने आदेश में कहा,
“लोक अभियोजक की ओर से समय मांगा गया है। मामले को सोमवार को सूचीबद्ध करें।”
अब आसाराम की अस्थायी जमानत की अर्जी पर 7 सितंबर को सुनवाई होगी। इससे पहले जून में आसाराम ने अस्थायी जमानत बढ़ाने की अपनी अर्जी वापस ले ली थी।


