[थाना आगजनी का मामला] जिन आरोपियों के घर गिराए गए, उन्हें 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया: असम सरकार ने हाईकोर्ट में कहा

Praveen Mishra

24 May 2024 7:09 PM IST

  • [थाना आगजनी का मामला] जिन आरोपियों के घर गिराए गए, उन्हें 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया: असम सरकार ने हाईकोर्ट में कहा

    असम सरकार ने बुधवार को गुहाटी हाईकोर्ट को सूचित किया कि छह प्रभावित व्यक्तियों को 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है, जिनके घर नागांव जिले के बताद्रवा में मई, 2022 में स्थानीय पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिए गए थे।

    उक्त प्रभावित व्यक्तियों पर मई, 2022 में बताद्रवा पुलिस स्टेशन में आगजनी का आरोप है और आग लगने के बाद उनके घरों पर कथित तौर पर बुलडोजर चला दिया गया था।

    पुलिस अधीक्षक, नागांव द्वारा सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कानून), असम को जारी 20 मई, 2024 के पत्र के अनुसार, जिन छह व्यक्तियों के घर ध्वस्त किए गए थे, उनमें से एक व्यक्ति को 12,50,000/- रुपये, दो व्यक्तियों को 5,00,000/- रुपये और तीन व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में 2,50,000/- रुपये का भुगतान किया गया है।

    चीफ़ जस्टिस विजय बिश्नोई और जस्टिस सुमन श्याम की खंडपीठ इस आरोप के आधार पर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी कि नगांव के एक नागरिक के घर को बटद्रवा पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों ने बुलडोजर से गिरा दिया।

    इससे पहले, कोर्ट ने वित्त विभाग, असम सरकार से कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा है कि मई, 2022 में असम पुलिस द्वारा बताद्रवा में जिन प्रभावित व्यक्तियों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया था, उन्हें मुआवजे का भुगतान कब तक कर दिया जाएगा।

    असम के सीनियर एडवोकेट डी. नाथ ने पीठ को सूचित किया कि विध्वंस अभियान के दौरान मारे गए एक सफीकुल इस्लाम की मौत के संबंध में मुआवजे का भुगतान नहीं किया जा सका क्योंकि 'परिजनों के नक्शेद' प्रमाण पत्र आज तक पेश नहीं किया गया है। यह आगे प्रस्तुत किया गया था कि उक्त स्वर्गीय सफीकुल इस्लाम के परिवार के सदस्यों या कानूनी उत्तराधिकारियों को मुआवजे का भुगतान 'नेक्स्ट ऑफ किन' प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते ही किया जाएगा।

    खंडपीठ ने राज्य को उन अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोर्ट को अवगत कराने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, जो अवैध रूप से प्रभावित व्यक्तियों के घरों को ध्वस्त करने के लिए जिम्मेदार थे।

    मामले की अगली सुनवाई 26 जून को होगी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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