शिरडी साईं बाबा के खिलाफ कथित आपत्तिजनक यूट्यूब वीडियो हटाने की शिकायत पर 7-10 दिन में फैसला करे केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

11 Aug 2026 4:25 PM IST

  • शिरडी साईं बाबा के खिलाफ कथित आपत्तिजनक यूट्यूब वीडियो हटाने की शिकायत पर 7-10 दिन में फैसला करे केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति को शिरडी साईं बाबा के संबंध में कथित तौर पर झूठी, अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री वाले यूट्यूब वीडियो तथा अन्य ऑनलाइन प्रकाशनों को हटाने की मांग वाली शिकायत और अपील पर जल्द फैसला करने का निर्देश देने की बात कही।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले को तत्काल विचार योग्य बताते हुए कहा कि अदालत ऐसा आदेश पारित करेगी, जिसके तहत शिकायत अपीलीय समिति को मामले पर 7 या 10 दिनों के भीतर फैसला करने के लिए कहा जाएगा।

    यह याचिका श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी की ओर से दायर की गई।

    ट्रस्ट का आरोप है कि कई यूट्यूब वीडियो और अन्य ऑनलाइन सामग्री में साईं बाबा के बारे में कथित रूप से झूठी, अपमानजनक और भड़काऊ बातें कही गई, जिससे धार्मिक वैमनस्य और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा मिलने की आशंका है।

    याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रमोद कुमार दुबे ने अदालत को बताया कि ट्रस्ट ने आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करते हुए संबंधित लिंक, वीडियो के समय और आपत्तिजनक हिस्सों का विवरण भी उपलब्ध कराया।

    इसके बावजूद यूट्यूब ने शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय एक “रूढ़िबद्ध जवाब” दिया और कहा कि सामग्री हटाने के लिए न्यायिक आदेश प्राप्त करना होगा।

    दलीलें सुनने के बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि शिकायत अपीलीय समिति को मामले पर फैसला करने के लिए कहा जाएगा।

    अदालत ने कहा,

    “मैं उनसे इस पर फैसला करने के लिए कहूंगी। इस याचिका को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत दर्ज शिकायतों और शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष दायर अपील के अतिरिक्त अभ्यावेदन के रूप में माना जाए, जिस पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया।”

    अदालत ने कहा कि मामले में उचित आदेश पारित किया जाएगा।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया मंचों ने प्रभावी शिकायत निवारण नहीं किया, जबकि ट्रस्ट ने कथित आपत्तिजनक सामग्री वाले विशिष्ट इंटरनेट पते, वीडियो में संबंधित समय और आपत्तिजनक अंशों की पहचान की थी।

    ट्रस्ट ने अदालत से यूट्यूब को संबंधित वीडियो और अन्य प्रकाशनों की पहुंच रोकने, उन्हें हटाने अथवा इंटरनेट पर अनुपलब्ध करने का निर्देश देने की मांग की।

    साथ ही, समान सामग्री को दोबारा प्रकाशित या फिर से अपलोड करने पर रोक लगाने की भी मांग की गई।

    याचिका के अनुसार, कई यूट्यूब चैनलों ने मार्च के आसपास साईं बाबा के संबंध में कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करना शुरू किया।

    ट्रस्ट का आरोप है कि इन प्रकाशनों में साईं बाबा को कथित तौर पर “चांद मियां”, “जेहादी”, ब्रिटिश जासूस, हत्यारा, बलात्कारी, डकैत और धर्म परिवर्तन कराने वाला बताया गया।

    ट्रस्ट के अनुसार, उसने 15, 17 और 19 जुलाई को यूट्यूब की शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत शिकायतें दर्ज कराईं।

    हालांकि, यूट्यूब ने इन शिकायतों को खारिज कर दिया और ट्रस्ट को संबंधित सामग्री अपलोड करने वालों से संपर्क करने या हाईकोर्ट से आदेश प्राप्त करने के लिए कहा।

    इसके बाद ट्रस्ट ने 26 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समक्ष अभ्यावेदन दिया और 29 जुलाई को शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष अपील दायर की। याचिका के अनुसार, यह अपील अभी लंबित है।

    हाईकोर्ट ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए शिकायत अपीलीय समिति से इस मामले पर शीघ्र निर्णय कराने की दिशा में आदेश पारित करने के संकेत दिए।

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