आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए MCD -NDMC के कर्मचारियों को मिलेगा प्रशिक्षण, लखनऊ नगर निगम लगाएगा शिविर: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
5 Oct 2026 5:42 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को राजधानी में पशु चिकित्सा, सहायक पशु चिकित्सा सेवाओं और आवारा कुत्तों को पकड़ने वाले कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि इसके लिए लखनऊ नगर निगम के साथ समन्वय किया जाए और जल्द से जल्द शिविर आयोजित किया जाए।
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की खंडपीठ ने कहा,
“NDMC और MCD को लखनऊ नगर निगम के साथ समन्वय कर उपरोक्त उद्देश्यों के लिए प्रशिक्षण शिविर जल्द से जल्द आयोजित करने का निर्देश दिया जाता है।”
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र गौरी मौलेखी ने कोर्ट को बताया कि उनके आग्रह पर लखनऊ नगर निगम ने दिल्ली में एक प्रशिक्षित व्यक्ति भेजकर 15 दिन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की सहमति दी।
यह प्रशिक्षण भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के अनुसार दिया जाएगा।
हाईकोर्ट एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इस याचिका के माध्यम से स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की निगरानी की जा रही है।
सुनवाई के दौरान नगर निकायों की ओर से पेश वकील ने बताया कि MCD के आनंद विहार और NDMC के दो क्षेत्रों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा चुके हैं और इनके परिणाम संतोषजनक रहे हैं।
कोर्ट ने MCDB और NDMC को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि उनके संबंधित क्षेत्रों के किन वार्डों में आवारा कुत्तों का पूरी तरह से नसबंदीकरण किया जा चुका है।
आवारा कुत्तों के नसबंदीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए MCD और NDMC ने कोर्ट को बताया कि दोनों निकायों के दो-दो अतिरिक्त वार्डों में भी शिविर लगाए जाएंगे। कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।
एमिकस क्यूरी गौरी मौलेखी ने आवारा कुत्तों के नसबंदीकरण के लिए प्रस्तावित पायलट शिविर को लागू करने का खाका भी कोर्ट के समक्ष रखा।
कोर्ट ने एमसीडी की ओर से पेश अधिवक्ता मनु चतुर्वेदी को उस पर सुझाव देने का निर्देश दिया। साथ ही MCD को विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर कोर्ट के समक्ष मंजूरी के लिए रखने को कहा।
मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
इससे पहले पिछले महीने हाईकोर्ट ने एमसीडी और एनडीएमसी को अपने-अपने क्षेत्र में एक-एक वार्ड की पहचान कर वहां आवारा कुत्तों के नसबंदीकरण और टीकाकरण के लिए पायलट शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया।
यह कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के तहत हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित हाईकोर्ट को अपने-अपने क्षेत्रों में इन निर्देशों के पालन की निगरानी करने और अनुपालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का अधिकार दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्देशों का दायरा बढ़ा सकते हैं, लेकिन ऐसा करते समय शीर्ष अदालत के मूल निर्देशों को कमजोर नहीं किया जा सकता।
इसी के तहत सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को “सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन के संबंध में” शीर्षक से स्वत: संज्ञान याचिका दर्ज कर अनुपालन की निगरानी करने को कहा था।
यह मामला आवारा कुत्तों के हमलों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की स्वत: संज्ञान कार्यवाही से जुड़ा है। 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और इसी तरह के सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसे स्थानों से पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हीं स्थानों पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।

