नेटफ्लिक्स सीरीज़ Ba*ds of Bollywood को लेकर समीर वानखेड़े की मानहानि याचिका खारिज
Amir Ahmad
29 Jan 2026 12:51 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े द्वारा नेटफ्लिक्स सीरीज़ Ba**ds of Bollywood में कथित मानहानिकारक चित्रण को लेकर दायर वाद को खारिज कर दिया।
जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने क्षेत्राधिकार के आधार पर याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए वानखेड़े को सक्षम न्यायालय के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि वादपत्र को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए लौटाया जाता है तथा अंतरिम आवेदन भी खारिज किए जाते हैं।
यह वाद आर्यन खान द्वारा निर्देशित और रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित उक्त वेब सीरीज़ में एक पात्र के माध्यम से वानखेड़े की छवि को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर आधारित था।
वानखेड़े ने सीरीज़ से आपत्तिजनक अंश हटाने और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी।
अंतरिम निषेधाज्ञा पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने दो प्रमुख प्रश्न तय किए थे पहला, क्या यह वाद दिल्ली में बनाए रखने योग्य है। दूसरा, क्या सीरीज़ में किया गया चित्रण प्रथम दृष्टया संरक्षित कलात्मक अभिव्यक्ति की सीमा पार कर मानहानि की श्रेणी में आता है।
समीर वानखेड़े की ओर से सीनियर एडवोकेट जे साई दीपक ने दलील दी कि वाद दिल्ली में सुनवाई योग्य है, क्योंकि उनके पारिवारिक सदस्य यहां रहते हैं। उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाहियां दिल्ली में लंबित हैं और उनके खिलाफ समाचार प्रकाशित करने वाले प्रमुख मीडिया संस्थान भी दिल्ली में स्थित हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कथित आपत्तिजनक सामग्री उपलब्ध है, तब तक वानखेड़े को अपूरणीय क्षति हो रही है।
वहीं, रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट की ओर से सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल ने वाद की क्षेत्राधिकार पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि वानखेड़े मुंबई के निवासी हैं और प्रोडक्शन हाउस का पंजीकृत कार्यालय भी मुंबई में है, इसलिए वाद दिल्ली के बजाय मुंबई में दायर किया जाना चाहिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल इंटरनेट पर सामग्री की व्यापक पहुंच के आधार पर क्षेत्राधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता।
नेटफ्लिक्स की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव नय्यर ने दलील दी कि इस प्रकार के मामलों में मानहानि की कसौटी अत्यंत कठोर होती है, जिसे अंतरिम चरण में सिद्ध नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि वानखेड़े से जुड़े कथित आरोप और जांच से संबंधित जानकारियां वर्ष 2022 से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं, जिनके विरुद्ध अब तक कोई विधिक कार्रवाई नहीं की गई।
नय्यर ने यह भी स्पष्ट किया कि सीरीज़ का उद्देश्य बॉलीवुड संस्कृति को व्यंग्य और डार्क कॉमेडी के माध्यम से प्रस्तुत करना है, जिसे मानहानि के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
वाद में रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, नेटफ्लिक्स, एक्स कॉर्प (पूर्व ट्विटर), गूगल एलएलसी, मेटा प्लेटफॉर्म्स, आरपीजी लाइफस्टाइल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और जॉन डो को प्रतिवादी बनाया गया था।
वानखेड़े ने दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी, जिसे टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को दान करने का प्रस्ताव दिया गया था।
वानखेड़े का आरोप था कि सीरीज़ को जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया, जबकि उनसे संबंधित मामला बॉम्बे हाइकोर्ट और एनडीपीएस विशेष अदालत में लंबित है।
उन्होंने यह भी आपत्ति जताई थी कि सीरीज़ में एक पात्र द्वारा “सत्यमेव जयते” कहने के बाद अशोभनीय इशारा दिखाया गया है, जो राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का उल्लंघन है।
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद दिल्ली हाइकोर्ट ने वाद को क्षेत्राधिकार के अभाव में सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया और वानखेड़े को सक्षम न्यायालय में जाने की स्वतंत्रता प्रदान की।

