दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, जब तक स्वीकृत रिक्त पद पर नियुक्ति और समान कार्य सिद्ध न हो: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

22 July 2026 1:01 PM IST

  • दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, जब तक स्वीकृत रिक्त पद पर नियुक्ति और समान कार्य सिद्ध न हो: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी केवल लंबे समय तक काम करने के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।

    इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि उसकी नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत रिक्त पद पर की गई और वह नियमित कर्मचारी के समान कार्य कर रहा था।

    जस्टिस अमित महाजन ने यह फैसला एक कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए दिया।

    मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने 13 जून 1985 को प्रतिवादी संस्थान में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया था।

    बता दें, वर्ष 1987 में उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिसे बाद में श्रम न्यायालय ने रद्द करते हुए उसे सेवा में बहाल करने और बकाया वेतन देने का आदेश दिया। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर कर्मचारी को 28 अगस्त 1996 से पुनः नियुक्त कर दिया गया।

    इसके बाद कर्मचारी ने अपनी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सहायक विक्रेता के पद पर नियमितीकरण की मांग की। हालांकि औद्योगिक न्यायाधिकरण ने उसका दावा खारिज किया, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट का रुख किया।

    याचिकाकर्ता का कहना था कि वह केवल दैनिक वेतनभोगी नहीं था बल्कि नियमित प्रकृति का कार्य करता था। उसने यह भी दावा किया कि प्रबंधन के गवाह ने स्वीकार किया था कि उसका काम नियमित सहायक विक्रेता जैसा ही था।

    वहीं प्रबंधन ने कहा कि सहायक विक्रेता का कोई स्वीकृत रिक्त पद उपलब्ध नहीं था। साथ ही याचिकाकर्ता का कार्य नियमित सहायक विक्रेता से अलग था और वह केवल सहायक (हेल्पर) का काम करता था।

    हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण के निष्कर्षों को सही ठहराते हुए कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि सहायक विक्रेता के स्वीकृत रिक्त पद उपलब्ध नहीं थे और याचिकाकर्ता का कार्य भी उस पद के नियमित कर्मचारियों से भिन्न था।

    कोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण तभी संभव है, जब कर्मचारी की नियुक्ति किसी स्वीकृत रिक्त पद पर हुई हो और वह सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई हो।

    कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उमादेवी फैसले सहित अन्य निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति का अधिकार तभी उत्पन्न होता है, जब कानून द्वारा निर्धारित आवश्यक शर्तें पूरी हों।

    हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि सहायक विक्रेता के कार्य में पूरे बिक्री कार्य के साथ-साथ लेखा संबंधी जिम्मेदारियां भी शामिल थीं, जबकि याचिकाकर्ता केवल सहायक का कार्य कर रहा था। इसलिए दोनों के कार्यों को समान नहीं माना जा सकता।

    इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए कर्मचारी की याचिका खारिज की।

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