क्या सांसद राशिद इंजीनियर को संसद सत्र में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी जा सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट ने NIA से पूछा
Amir Ahmad
6 Feb 2025 7:30 AM

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से पूछा कि क्या जम्मू-कश्मीर के सांसद राशिद इंजीनियर को संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी जा सकती है।
जस्टिस विकास महाजन ने NIA के वकील से निर्देश प्राप्त करने को कहा और मामले को कल यानी शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
न्यायालय ने NIA के वकील से पूछा,
"वह निर्वाचित सांसद हैं। उन्हें कस्टडी में भेजने में क्या कठिनाई है?"
न्यायालय राशिद की उस याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें उसने अपनी दूसरी नियमित जमानत याचिका पर ट्रायल कोर्ट द्वारा शीघ्र निर्णय देने की मांग की। उन्होंने 31 जनवरी से शुरू हुए संसदीय बजट सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत भी मांगी। वैकल्पिक रूप से उन्होंने बजट सत्र के दौरान हिरासत में पैरोल की मांग की।
इस सप्ताह की शुरुआत में न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया, जब उसे सूचित किया गया कि इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दायर किया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आवेदन दायर कर संसद सदस्यों/विधानसभा सदस्यों (सांसदों/विधायकों) के मुकदमों के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2017 के निर्देशों में स्पष्टीकरण मांगा।
आवेदन में स्पष्टीकरण मांगा गया,
"क्या राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत गठित विशेष न्यायालय, यदि विशेष एमपी/एमएलए न्यायालय के रूप में नामित किया जाता है तो वह केवल उक्त क़ानून के तहत सांसदों/विधायकों से जुड़े मामलों का ही निपटारा करने तक सीमित होगा या क्या वह अपने मौजूदा वैधानिक अधिदेश के अनुसार अन्य अपराधियों पर अपने अधिकार क्षेत्र का समवर्ती रूप से प्रयोग कर सकता है। उन मामलों को एमपी/एमएलए को आरोपी के रूप में रखने वाले मामलों के साथ समानांतर रूप से तय कर सकता है।"
सुनवाई के दौरान एडवोकेट कन्हैया सिंघल दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से पेश हुए और प्रस्तुत किया कि आवेदन दायर किया गया और मामले को आधिकारिक वेबसाइट पर बताए अनुसार 10 या 11 फरवरी को सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को कल सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा।
राशिद की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन ने कहा कि सांसद के लिए सुप्रीम कोर्ट में तत्काल उल्लेख करने से स्थिति का समाधान नहीं होगा, क्योंकि उनके पास कोई उपाय नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मेरे पास कोई उपाय नहीं होगा तो अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जाएगी।
इसके बाद हरिहरन ने न्यायालय से आग्रह किया कि राशिद को बजट सत्र में भाग लेने के लिए हिरासत में पैरोल दी जाए और विधायक के निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं किया जाए।
राशिद ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के जज को उनके लंबित नियमित जमानत आवेदन पर निर्णय लेने के लिए निर्देश देने की मांग की।
इसके बजाय उन्होंने प्रार्थना की कि रिट याचिका को उनकी दूसरी नियमित जमानत याचिका के रूप में माना जाए और हाईकोर्ट द्वारा इस पर निर्णय लिया जाए।
यह घटनाक्रम तब हुआ, जब UAPA मामले पर निर्णय दे रहे एएसजे ने पिछले साल दिसंबर में कहा कि वह केवल राशिद के विविध आवेदन पर निर्णय ले सकता है, लेकिन उनके नियमित जमानत आवेदन पर नहीं।
इसके बाद एडिशनल सेशन जज कोर्ट ने जिला जज से अनुरोध किया कि राशिद के सांसद बनने के बाद UAPA मामले को एमपी/एमएलए नामित न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया जाए।
राशिद 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामुल्ला निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए और 2017 के आतंकी-वित्तपोषण मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत NIA द्वारा उन्हें गिरफ्तार किए जाने के बाद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
कथित आतंकी वित्तपोषण मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत NIA द्वारा आरोपित किए जाने के बाद से राशिद 2019 से जेल में हैं।
केस टाइटल: अब्दुल राशिद शेख बनाम एनआईए