संपत्ति कर तय करने की पद्धति अदालत नहीं कर सकती निर्धारित, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की खान मार्केट एसोसिएशन की याचिका

Amir Ahmad

21 Aug 2026 3:41 PM IST

  • संपत्ति कर तय करने की पद्धति अदालत नहीं कर सकती निर्धारित, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की खान मार्केट एसोसिएशन की याचिका

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल कर अदालत किसी वैधानिक प्राधिकरण को संपत्तियों का मूल्यांकन करने या संपत्ति कर निर्धारित करने के लिए कोई खास पद्धति अपनाने का निर्देश नहीं दे सकती। ऐसी पद्धति तय करना संबंधित वैधानिक और प्रशासनिक प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने खान मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। एसोसिएशन ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को संपत्तियों के मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करने के लिए एक समान पद्धति तैयार करने और उसे लागू करने का निर्देश देने की मांग की थी।

    खान मार्केट के दुकानदारों और संपत्ति मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि समान परिस्थितियों वाली संपत्तियों के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अलग-अलग तरीके से मूल्यांकन योग्य मूल्य तय कर संपत्ति कर का आकलन कर रही है।

    एसोसिएशन ने मांग की थी कि इकाई क्षेत्र पद्धति लागू होने तक संपत्तियों के मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करने के लिए एक समान तरीका अपनाया जाए।

    हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जारी परमादेश का उद्देश्य किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार के अनुरूप वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य का पालन सुनिश्चित करना है। इसका इस्तेमाल अदालत द्वारा खुद वैधानिक प्राधिकरण का काम अपने हाथ में लेने या यह तय करने के लिए नहीं किया जा सकता कि प्राधिकरण अपने प्रशासनिक कार्य को किस तरीके से पूरा करे।

    पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक सक्षम प्राधिकरण वैधानिक ढांचे के भीतर काम कर रहा है, तब तक मूल्यांकन योग्य मूल्य निर्धारित करने की पद्धति तय करना उसके वैधानिक और प्रशासनिक कार्यों का हिस्सा है। अदालत इस प्रक्रिया में अपनी बनाई हुई पद्धति को प्राधिकरण पर लागू नहीं कर सकती।

    अदालत ने कहा,

    “परमादेश जारी करने की आड़ में अदालत सक्षम वैधानिक प्राधिकरण द्वारा तय की जाने वाली पद्धति का स्थान अपनी पद्धति से नहीं ले सकती।”

    न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य यह देखना है कि वैधानिक शक्ति का इस्तेमाल कानून के अनुरूप हुआ या नहीं न कि अदालत खुद वह कार्य करने लगे जो कानून ने वैधानिक प्राधिकरण को सौंपा है।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता किसी वैधानिक प्राधिकरण के कामकाज में अनियमितता का आरोप लगा रहा है, अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल कर कोई नया संस्थागत तंत्र बनाने का निर्देश सामान्य तौर पर नहीं दिया जा सकता।

    हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि कर या राजस्व प्राधिकरण मनमाने तरीके से काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि कोई कर या राजस्व प्राधिकरण ऐसा कर लगाता या वसूलता है, जो संविधान के विपरीत है, कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर है या जिसे लगाने का उसे अधिकार ही नहीं है तो ऐसे मामले में रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अदालत ने कहा कि उचित मामले में वह गैरकानूनी कर लगाने से रोकने के लिए परमादेश जारी कर सकती है और कानून के अनुसार आवश्यक राहत भी दे सकती है। इसी तरह यदि किसी आकलन या कर निर्धारण को कानून के विपरीत, अधिकार क्षेत्र से बाहर, कानूनी रूप से भेदभावपूर्ण या शक्ति के अनुचित इस्तेमाल से प्रभावित साबित किया जाता है तो उसकी न्यायिक समीक्षा संभव है।

    लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी न्यायिक समीक्षा और अदालत से एक समान मूल्यांकन पद्धति निर्धारित करने की मांग, दोनों अलग-अलग बातें हैं। अदालत ने कहा कि वह नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के लिए एक समान कर निर्धारण पद्धति निर्धारित करने या उसके वैधानिक कामकाज की निगरानी के लिए विशेषज्ञ तंत्र बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।

    इन्हीं टिप्पणियों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने खान मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका खारिज की।

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