DUSU चुनाव में राजनीतिक दलों के प्रभाव का आरोप, दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका; कल होगी सुनवाई

Amir Ahmad

15 Sept 2026 11:55 AM IST

  • DUSU चुनाव में राजनीतिक दलों के प्रभाव का आरोप, दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका; कल होगी सुनवाई

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के 2026-27 के चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में 13 अगस्त को जारी चुनाव अधिसूचना और 11 सितंबर के नोटिस को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता ने मांग की कि छात्र संघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों और केंद्र सरकार के संबंधित निर्देशों के अनुरूप कराया जाए।

    मामले का मंगलवार को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष उल्लेख किया गया। पीठ ने मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दी।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा विजेता की ओर से दायर याचिका में चुनाव अधिसूचना रद्द करने और यूनिवर्सिटी को चुनाव प्रक्रिया लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार संचालित करने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिका एडवोकेट स्नेह वर्धन और प्रतिभा सिन्हा के माध्यम से दायर की गई।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि DUSU चुनाव की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों की भागीदारी और प्रभाव दिखाई दे रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि छात्र चुनाव और छात्र प्रतिनिधित्व राजनीतिक दलों के नियंत्रण या प्रभाव से स्वतंत्र होना चाहिए।

    याचिका के अनुसार राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के पैनल जारी किए। इनमें कांग्रेस से जुड़े NSUI ,AISA -SFI गठबंधन, आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASP और भाजपा की छात्र इकाई ABVP शामिल हैं। याचिका में दावा किया गया है कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए चुने गए उम्मीदवार इन्हीं पैनलों से सामने आए।

    याचिकाकर्ता ने इसे लिंगदोह समिति की रिपोर्ट के खंड 6.3 में निर्धारित उस सिद्धांत के विपरीत बताया, जिसके तहत छात्र चुनाव और छात्र प्रतिनिधित्व को राजनीतिक दलों के प्रभाव से अलग रखने की बात कही गई।

    याचिका में कहा गया कि राजनीतिक दलों की छात्र इकाइयां उन्हीं दलों से जुड़ी हैं और उनके उम्मीदवार संबंधित राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित होते हैं। इसलिए लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत ऐसे उम्मीदवारों को छात्र चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

    याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि छात्र संघ चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के बढ़ते प्रभाव के कारण विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल राजनीतिक गतिविधियों और चर्चाओं से प्रभावित हो रहा है। याचिका के मुताबिक यूनिवर्सिटी परिसर में आपसी सौहार्द और अकादमिक चर्चाओं की जगह राजनीतिक विचारधाराओं पर आधारित बहस और प्रभाव बढ़ रहा है। इससे छात्रों के बीच कटुता पैदा हो रही है। अंततः इसका असर विश्वविद्यालय में पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था पर पड़ रहा है।

    याचिका में कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया को बाध्यकारी न्यायिक निर्देशों और लागू नियमों के अनुरूप संचालित किया जाना जरूरी है, ताकि डूसू चुनाव में निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानूनी वैधता सुनिश्चित की जा सके।

    अब दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगी।

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