अश्लील कंटेंट फैलाने वाले ऐप्स पर सख्ती करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल और एप्पल को दिया निर्देश
Amir Ahmad
13 May 2026 3:44 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल LLC और एप्पल इंक को निर्देश दिया कि उनके प्ले-स्टोर पर उपलब्ध मोबाइल ऐप्स के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को तुरंत रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि मध्यस्थ मंचों की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें ऐप्स को अपलोड की अनुमति देते समय भी पूरी सतर्कता बरतनी होगी।
अदालत ने यह आदेश रुबिका थापा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि गूगल और एप्पल के प्ले-स्टोर पर मौजूद कई मोबाइल ऐप्स अश्लील, अभद्र और अशोभनीय सामग्री का प्रसार कर रहे हैं, लेकिन संबंधित प्राधिकरण इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे।
याचिका में यह भी कहा गया कि इन ऐप्स का इस्तेमाल अनैतिक तस्करी, वेश्यावृत्ति, नशीले पदार्थों के कारोबार, अवैध हथियारों के व्यापार, उगाही और हनी ट्रैप जैसे गंभीर अपराधों के लिए भी किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट तनमय मेहता ने अदालत को बताया कि इन ऐप्स पर उपलब्ध सामग्री सामान्य अश्लील सामग्री से भी अधिक गंभीर और आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि इन मंचों का इस्तेमाल उगाही और हनी ट्रैप जैसे अपराधों में हो रहा है।
गूगल की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर शिकायत मिलने पर कार्रवाई और ऐप हटाने की मजबूत व्यवस्था मौजूद है।
इस पर अदालत ने कहा कि सवाल केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई का नहीं है बल्कि ऐसी सामग्री वाले ऐप्स को शुरू में ही रोकने का है।
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी याचिकाकर्ता की दलीलों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थ मंचों को एक कदम आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके माध्यम से ऐसी सामग्री प्रसारित न हो।
हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत मध्यस्थ मंचों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि उन्हें न केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करनी है, बल्कि ऐप अपलोड की अनुमति देते समय भी सावधानी बरतनी होगी।
अदालत ने कहा,
“हम उम्मीद करते हैं कि याचिका में लगाए गए आरोपों को देखते हुए गूगल, एप्पल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल सख्ती से कदम उठाएंगे और ऐसी वीडियो सामग्री के प्रसार को तुरंत रोकेंगे।”
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को तय की।
याचिका में जिन ऐप्स का उल्लेख किया गया, उनमें टैंगो, प्योर, चैमेट, बोलो जी, प्यारचैट, ब्लिंग, स्ट्रीमकर, लिवहब, मूमू, चैटो, वाइबली, फन पार्टी, हाईक्लब प्रो, जलवा और विंकू शामिल हैं।
याचिका के अनुसार, इन मंचों पर अत्यधिक अश्लील लाइव स्ट्रीमिंग दिखाई जाती है, जिसमें नग्नता और आपत्तिजनक सामग्री का खुले तौर पर प्रसारण होता है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन बताया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि इनमें से अधिकांश कंपनियां भारत से बाहर संचालित होती हैं और अपने स्वामित्व या पंजीकृत कार्यालय की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं देतीं। इनके सर्वर अमेरिका, तुर्किये, जापान, रूस और चीन जैसे देशों में स्थित हैं, जिससे भारतीय कानून के तहत कार्रवाई करना कठिन हो जाता है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इन मंचों के जरिए डीपफेक तकनीक का उपयोग कर संगठित उगाही और अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से अवैध धन लेनदेन जैसी गतिविधियां देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।

