NEET-PG 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने कट-ऑफ में कमी को ठहराया वैध, कहा- नीति निर्णय में कोई मनमानी नहीं
Amir Ahmad
17 Feb 2026 3:40 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने NEET-PG 2025 की पात्रता कट-ऑफ प्रतिशत में कमी करने का निर्णय बरकरार रखते हुए इसे चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि यह निर्णय विचार-विमर्श के बाद लिया गया और इसमें किसी प्रकार की मनमानी या दुर्भावना नहीं पाई गई।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कार्यपालिका द्वारा लिए गए प्रशासनिक या नीतिगत निर्णयों की न्यायिक समीक्षा केवल तभी की जा सकती है, जब उनमें स्पष्ट रूप से मनमानी या विकृति हो।
अदालत ने कहा,
“यह स्थापित विधि है कि प्रशासनिक कार्रवाई और कार्यपालिका के नीति निर्णय की न्यायिक समीक्षा केवल मनमानी और विकृति के आधार पर ही संभव है।”
मामला
याचिका अभ्यर्थी द्वारा दायर की गई, जिसमें नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन मेडिकल साइंसेस (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई, जिसमें NEET-PG 2025 के लिए न्यूनतम अर्हक प्रतिशत में संशोधन किया गया।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद कट-ऑफ कम करना मेरिट के मानकों को कमजोर करता है, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 तथा 47 के तहत राज्य के दायित्वों के विपरीत है।
यह भी कहा गया कि लगभग 9,000 रिक्त सीटों को भरने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया, जो शैक्षणिक मानकों में बाद में की गई ढील के समान है।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि पात्रता मानदंड में कमी से मेरिट पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अंतिम प्रवेश अभी भी मेरिट के आधार पर ही होगा।
अदालत ने कहा कि पात्रता का दायरा बढ़ाने से काउंसलिंग के राउंड-3 और यदि आयोजित हो तो स्ट्रे वैकेंसी राउंड में सीटों के भरने की संभावना बढ़ेगी।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,
“पात्रता मानदंड में कमी करने से केवल अधिक अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे रिक्त सीटों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित होगा और संभावित रिक्तियां रोकी जा सकेंगी।”
अदालत ने यह भी जोड़ा कि चयनित अभ्यर्थियों को अंततः पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स पूरा करना होगा और डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त करने के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
अदालत ने कहा,
“सार्वजनिक हित में यह आवश्यक है कि सभी रिक्त पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटें भरी जाएं ताकि अधिक डॉक्टर विशेषज्ञता हासिल कर सकें और अपने-अपने क्षेत्र में कुशल बन सकें।"
अदालत ने स्पष्ट किया कि जारी अधिसूचना में कोई विकृति नहीं पाई गई और वर्तमान में चल रही NEET-PG 2025 की राउंड-3 काउंसलिंग प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
इसी के साथ याचिका खारिज की गई।

