SFIO जांच के शुरुआती चरण में कॉरपोरेट मंत्रालय के जांच आदेश साझा नहीं किए जा सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

30 July 2026 5:39 PM IST

  • SFIO जांच के शुरुआती चरण में कॉरपोरेट मंत्रालय के जांच आदेश साझा नहीं किए जा सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की चल रही जांच के शुरुआती चरण में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के जांच संबंधी आदेश और उससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।

    अदालत ने कहा कि ऐसा करने से जांच और उससे जुड़ी अन्य न्यायिक कार्यवाहियां प्रभावित हो सकती हैं।

    जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने यह टिप्पणी करते हुए मांडके फाउंडेशन की याचिका खारिज की।

    फाउंडेशन ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और अन्य कंपनियों के खिलाफ SFIO जांच के लिए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों की प्रतियां मांगी थीं।

    मांडके फाउंडेशन मुंबई में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल एवं चिकित्सा अनुसंधान संस्थान का संचालन करता है।

    फाउंडेशन का कहना था कि उससे विस्तृत वित्तीय अभिलेख मांगे गए और जांच में सहयोग करने को कहा गया, लेकिन जांच अधिकृत करने वाले मंत्रालय के आदेश उपलब्ध नहीं कराए गए। उसका तर्क था कि इन आदेशों के बिना वह जांच के दायरे को समझने और अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने में सक्षम नहीं है।

    हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि SFIO की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और फाउंडेशन से केवल कंपनी अधिनियम की धारा 217 के तहत जानकारी मांगी गई।

    अदालत ने कहा कि नोटिस में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि जानकारी संबंधित कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में मांगी जा रही है।

    साथ ही यह भी बताया गया था कि फाउंडेशन और इन कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन के कारण उससे दस्तावेज मांगे गए। नोटिस में किन-किन वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक खातों के विवरण की आवश्यकता है, इसका भी उल्लेख किया गया।

    हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि SFIO की ओर से अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद फाउंडेशन ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद उसके वर्तमान और पूर्व निदेशकों को समन जारी किए गए।

    अदालत ने कहा कि यह जांच कई कंपनियों से जुड़ी हुई है और इसी जांच से संबंधित अन्य कार्यवाहियां बॉम्बे हाईकोर्ट में भी लंबित हैं।

    हाईकोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के आदेशों में संवेदनशील जानकारी शामिल है। ऐसे में इस चरण पर उन आदेशों और उनसे जुड़े दस्तावेजों का खुलासा करने से चल रही जांच और संबंधित न्यायिक कार्यवाहियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

    अदालत ने कहा,

    "जांच के इस प्रारंभिक चरण में याचिकाकर्ता को कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के आदेशों और उनसे जुड़े दस्तावेजों के खुलासे का कोई प्रवर्तनीय अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है। यदि भविष्य में उसके विरुद्ध कोई प्रतिकूल कार्रवाई की जाती है, तो वह कानून के तहत उपलब्ध सभी उपायों का सहारा लेने और अपने सभी वैध तर्क रखने के लिए स्वतंत्र होगा।"

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