विदेश जाने के लिए LOC हटाने की मांग पहले ट्रायल कोर्ट में करें, हाईकोर्ट ने कहा- यात्रा की शर्तें तय करने में वही सक्षम

Amir Ahmad

2 Sept 2026 3:02 PM IST

  • विदेश जाने के लिए LOC हटाने की मांग पहले ट्रायल कोर्ट में करें, हाईकोर्ट ने कहा- यात्रा की शर्तें तय करने में वही सक्षम

    लुक आउट सर्कुलर (LOC) के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले व्यक्ति यदि अस्थायी तौर पर विदेश जाना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले उस विशेष अदालत का रुख करना होगा, जहां संबंधित अभियोजन शिकायत पर सुनवाई चल रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि विदेश यात्रा के लिए LOC को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग पर पहली सुनवाई संबंधित मामले की विशेष अदालत में होनी चाहिए।

    जस्टिस मधु जैन ने स्पष्ट किया कि इसका LOC जारी किए जाने या उसके जारी रहने को चुनौती देने वाली याचिका के गुण-दोष पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हाईकोर्ट में LOC को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उचित समय पर स्वतंत्र रूप से विचार किया जाएगा।

    अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा के लिए LOC को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग पर कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है। इनमें यात्रा का उद्देश्य और अवधि, आपराधिक कार्यवाही किस चरण में है, आवेदक के जांच में जरूरत पड़ने पर उपलब्ध रहने की संभावना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लगाई जाने वाली शर्तें शामिल हैं।

    हाईकोर्ट ने कहा कि ये सभी पहलू लंबित आपराधिक कार्यवाही से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए जिस अदालत के सामने अभियोजन शिकायत पहले से लंबित है, वह इन परिस्थितियों का अधिक प्रभावी और पूरी जानकारी के साथ आकलन कर सकती है।

    अदालत ने कहा कि संबंधित अदालत के पास मामले की पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड मौजूद होगा और वह व्यक्ति के विदेश जाने के अधिकार तथा आपराधिक कार्यवाही की जरूरतों के बीच संतुलन बनाते हुए आवश्यक शर्तें लगा सकती है।

    यह आदेश संजय डांगी और अमित डांगी की याचिकाओं पर आया। दोनों ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पिछले वर्ष दर्ज किए गए ECIR से जुड़े मामले में कथित तौर पर जारी LOC को रद्द करने की मांग की थी। याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान दोनों ने कारोबारी उद्देश्य से विदेश जाने के लिए LOC को अस्थायी रूप से निलंबित करने की भी मांग की।

    खास बात यह थी कि दोनों को संबंधित मूल FIR या प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल अभियोजन शिकायत में आरोपी नहीं बनाया गया। संजय डांगी को मामले में गवाह भी नहीं बनाया गया, जबकि अमित डांगी को अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर सूचीबद्ध किया गया।

    मामले में हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि LOC को अस्थायी रूप से निलंबित कर विदेश जाने की अनुमति देने की मांग पर पहले हाईकोर्ट को विचार करना चाहिए या उस सक्षम अदालत को, जिसके सामने प्रवर्तन निदेशालय की अभियोजन शिकायत पहले से लंबित है।

    अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित LOC व्यवस्था और सुमेर सिंह सल्कान बनाम सहायक निदेशक मामले में तय सिद्धांतों का उल्लेख किया। हाईकोर्ट ने कहा कि निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लंबित मामले की ट्रायल कोर्ट या संबंधित थाने पर अधिकार रखने वाली अदालत, संबंधित व्यक्ति के आवेदन पर LOC वापस लेने या उसमें आवश्यक बदलाव करने पर विचार कर सकती है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 'संबंधित व्यक्ति' का मतलब उस व्यक्ति से है जिसके खिलाफ LOC जारी की गई। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि वह व्यक्ति संबंधित मामले में आरोपी के रूप में नामजद हो।

    इस आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही दोनों याचिकाकर्ता आरोपी नहीं हैं और अमित डांगी को अभियोजन पक्ष ने गवाह बनाया है। फिर भी विशेष अदालत उनकी सीमित मांग पर विचार कर सकती है कि उन्हें अस्थायी तौर पर विदेश यात्रा की अनुमति दी जाए।

    हालांकि, अदालत ने साफ किया कि दोनों का आरोपी न होना LOC जारी करने और उसे जारी रखने को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं में महत्वपूर्ण तथ्य रहेगा। इस चुनौती के गुण-दोष पर हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से बाद में विचार करेगा।

    अदालत ने कहा कि मौजूदा आवेदनों में चूंकि याचिकाकर्ता केवल विदेश यात्रा के उद्देश्य से LOC को अस्थायी रूप से निलंबित कराने की मांग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पहले दिल्ली की उस सक्षम अदालत का रुख करना चाहिए, जिसके समक्ष ED की अभियोजन शिकायत लंबित है।

    हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता विशेष अदालत के समक्ष आवेदन दाखिल करते हैं तो अदालत उन्हें कानून के अनुसार और उनके गुण-दोष के आधार पर जल्द से जल्द निपटाए। दूसरे पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर भी दिया जाए।

    साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि LOC को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं का लंबित रहना विशेष अदालत के फैसले को प्रभावित नहीं करेगा। विशेष अदालत को विदेश यात्रा की अनुमति से जुड़े आवेदन पर स्वतंत्र रूप से फैसला करना होगा।

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