0% उपस्थिति वाले स्टूडेंट अगले सेमेस्टर में एडमिशन नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

18 May 2026 5:27 PM IST

  • 0% उपस्थिति वाले स्टूडेंट अगले सेमेस्टर में एडमिशन नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट को सीधे चौथे सेमेस्टर में प्रवेश देने से इनकार करने का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि जिस स्टूडेंट ने तीसरे सेमेस्टर में एक भी कक्षा में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई और परीक्षा भी नहीं दी, वह अगले सेमेस्टर में पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता।

    चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि 0 प्रतिशत उपस्थिति वाले स्टूडेंट्स की तुलना केवल कम उपस्थिति वाले छात्रों से नहीं की जा सकती।

    अदालत ने LLB स्टूडेंट अमन बंसल की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अमन बंसल ने सिंगल बेंच के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दूसरे सेमेस्टर का परिणाम घोषित करने का निर्देश तो दिया गया था, लेकिन चौथे सेमेस्टर में आगे बढ़ने की मांग ठुकरा दी गई थी।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “जो स्टूडेंट किसी सेमेस्टर में एक भी कक्षा में शामिल नहीं हुए और उस सेमेस्टर की परीक्षा में भी नहीं बैठे, वे अगले सेमेस्टर में एडमिशन का लाभ नहीं मांग सकते, भले ही प्रवेश से वंचित किया जाना उनकी गलती न हो।”

    अदालत ने साफ किया कि कम उपस्थिति और पूरी तरह अनुपस्थित रहने के मामलों में समानता नहीं हो सकती।

    मामले के अनुसार, लॉ सेंटर-1 के स्टूडेंट अमन बंसल ने पहले सेमेस्टर के सभी विषय पास कर लिए थे। हालांकि दूसरे सेमेस्टर में उनकी उपस्थिति 27.58 प्रतिशत होने के कारण उन्हें रोक दिया गया था।

    इसके बावजूद यूनिवर्सिटी द्वारा गठित समिति के समक्ष लंबित कार्यवाही के परिणाम के अधीन उन्हें अस्थायी रूप से दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई।

    बाद में उनका दूसरे सेमेस्टर का परिणाम रोक दिया गया और उन्हें तीसरे सेमेस्टर में एडमिशन नहीं दिया गया। इसी कारण उन्होंने तीसरे सेमेस्टर की कोई कक्षा नहीं की और न ही परीक्षा में शामिल हुए।

    अदालत ने कहा कि “सुषांत रोहिल्ला आत्महत्या मामले” में दिया गया फैसला केवल कम उपस्थिति वाले मामलों पर लागू होता है, न कि “शून्य उपस्थिति” वाले मामलों पर।

    खंडपीठ ने यह भी कहा कि स्टूडेंट ने तीसरे सेमेस्टर के दौरान अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया, बल्कि चौथा सेमेस्टर शुरू होने के बाद राहत मांगी।

    अदालत ने कहा,

    “किसी भी स्थिति में, जब अपीलकर्ता ने तीसरे सेमेस्टर की एक भी कक्षा में हिस्सा नहीं लिया तो उसे पूरक परीक्षा में बैठने और उसके आधार पर चौथे सेमेस्टर में एडमिशन मांगने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

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