साढ़े तीन साल में सिर्फ एक गवाह की गवाही, हथियार और पैसे का भी नहीं मिला सुराग: UAPA मामले में हाईकोर्ट ने दी जमानत

Amir Ahmad

25 Aug 2026 12:45 PM IST

  • साढ़े तीन साल में सिर्फ एक गवाह की गवाही, हथियार और पैसे का भी नहीं मिला सुराग: UAPA मामले में हाईकोर्ट ने दी जमानत

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हिंदू नेताओं की कथित लक्षित हत्या की साजिश से जुड़े UAPA मामले में आरोपी निशान सिंह को नियमित जमानत दी।

    कोर्ट ने कहा कि आरोपी के अपने कथित खुलासे और स्वीकारोक्ति के अलावा राज्य ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं रख सका जिससे उसका कथित गिरोह के सदस्यों से संबंध स्थापित हो सके।

    जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने यह भी ध्यान दिया कि आरोपी करीब 3.7 साल से जेल में है, जबकि अभियोजन के 16 गवाहों में से अब तक केवल एक की गवाही हुई। ऐसे में मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना भी स्पष्ट नहीं है।

    मामला मोहाली में दर्ज FIR से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। अभियोजन का आरोप है कि प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े कथित नेटवर्क के जरिए पंजाब में अशांति फैलाने के लिए हिंदू नेताओं की लक्षित हत्या की योजना बनाई जा रही थी।

    निशान सिंह और सह-आरोपी युवराज सिंह को 17 जनवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया। दोनों के पास से एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद होने का दावा किया गया। जिस मोटरसाइकिल पर दोनों सवार थे, वह भी बिना पंजीकरण नंबर की बताई गई।

    पूछताछ के दौरान निशान सिंह, युवराज सिंह और जसपाल सिंह के कथित खुलासों के आधार पर अभियोजन ने दावा किया कि खन्ना और मोहाली में हिंदू नेताओं तथा जालंधर में एक अन्य नेता की हत्या की योजना बनाई गई। आरोप है कि इस काम के लिए अमृतपाल नाम के व्यक्ति की ओर से धन उपलब्ध कराया गया।

    निचली अदालत ने हथियार बरामदगी और कथित लक्षित हत्याओं की योजना के आरोपों को देखते हुए 29 अप्रैल को निशान सिंह की जमानत याचिका खारिज की थी।

    हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसका नाम मूल FIR में नहीं था। पिस्तौल और कारतूस की बरामदगी भी उससे और युवराज सिंह से संयुक्त रूप से हुई, जब दोनों एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे।

    राज्य ने आरोपी के कथित खुलासे, हथियार बरामदगी और अमृतपाल के साथ बातचीत की एक आवाज रिकॉर्ड के प्रतिलेख पर भरोसा किया।

    राज्य का कहना था कि बातचीत में हथियारों की आपूर्ति का संदर्भ था और आरोपी ने हिंदू नेताओं की हत्या की योजना के संबंध में कथित स्वीकारोक्ति भी की थी।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि पिस्तौल और कारतूस की बरामदगी आरोपी के कथित खुलासे से पहले हुई। इसके अलावा आरोपी के अपने कथित बयानों के अलावा राज्य ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिखा सका, जिससे उसका कथित गिरोह के सदस्यों से संबंध स्थापित हो।

    कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि आरोपी के खिलाफ एक पुराने आपराधिक मामले के अलावा कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वह मामला भी जेल में रहते हुए हुई मारपीट की घटना से संबंधित था।

    पीठ ने आरोपी के लंबे समय से जेल में होने, मुकदमे की धीमी प्रगति, अब तक केवल एक गवाह के बयान दर्ज होने और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की प्रकृति को महत्वपूर्ण माना।

    कोर्ट ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि आरोपी के कथित खुलासे को साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत स्वीकार्य माना जा सकता है या वह हिरासत में की गई ऐसी स्वीकारोक्ति है, जिसे धारा 25 के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता, इस पर विचार योग्य कानूनी प्रश्न मौजूद हैं।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं कर रही। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए खंडपीठ ने निशान सिंह को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।

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