अंतरिम भरण-पोषण के स्तर पर पत्नी की कमाई मानकर नहीं चला जा सकता: दिल्ली हाइकोर्ट
Amir Ahmad
7 Jan 2026 2:58 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति द्वारा पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण दिए जाने के प्रश्न पर यह पूर्वधारणा नहीं बनाई जा सकती कि पत्नी स्वयं कमाने में सक्षम है या वह आय अर्जित कर रही है।
न्यायालय ने कहा कि केवल पति का यह कहना कि पत्नी काम करती है और कमाती है, बिना किसी प्राथमिक साक्ष्य के, अंतरिम स्तर पर स्वीकार्य नहीं हो सकता।
जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें पत्नी ने परिवार न्यायालय द्वारा उसे मात्र ढाई हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण दिए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार, पक्षकारों का विवाह वर्ष 2021 में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। विवाह से कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई।
पत्नी का कहना था कि वह गृहिणी है, उसके नाम कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है, आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है और उसने केवल ग्यारहवीं कक्षा तक ही शिक्षा प्राप्त की है। उसने यह भी कहा कि वह अपने भरण-पोषण के लिए पूरी तरह अपने मायके पर निर्भर है।
पत्नी ने दावा किया कि पति साधन-संपन्न व्यक्ति है स्नातक है और एक निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य करता है, जिससे उसे लगभग पच्चीस हजार रुपये प्रतिमाह आय होती है। उसने यह भी आरोप लगाया कि फैमिली कोर्ट ने पति की शैक्षणिक योग्यता और न्यूनतम मजदूरी के मानकों के आधार पर उसकी आय का सही आकलन नहीं किया।
वहीं, पति ने दलील दी कि पत्नी स्वेच्छा से वैवाहिक गृह छोड़कर चली गई और वह उसके साथ रहने की इच्छुक नहीं थी।
पति का कहना था कि पत्नी एक नर्सरी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्य करती है और लगभग दस हजार रुपये प्रतिमाह कमाती है, जिससे वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है।
हाइकोर्ट ने प्रारंभ में ही यह स्पष्ट किया कि इस तथ्य को लेकर कोई विवाद नहीं है कि पत्नी ने केवल ग्यारहवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है।
न्यायालय ने कहा कि पति द्वारा पत्नी के नर्सरी शिक्षिका होने और आय अर्जित करने का दावा किया गया, लेकिन इस संबंध में कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया।
न्यायालय ने कहा कि बिना किसी प्राथमिक प्रमाण के पत्नी की कमाई का केवल मौखिक दावा, अंतरिम भरण-पोषण के स्तर पर पति के लिए सहायक नहीं हो सकता। ऐसे में पत्नी को न तो आय अर्जित करने वाली और न ही स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम माना जा सकता।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि पति ने स्वयं अपनी आय लगभग दस हजार रुपये प्रतिमाह बताई, जो एक स्नातक व्यक्ति के लिए कुशल श्रेणी की न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। ऐसे में पति की आय का आकलन न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया जाना उचित है।
न्याय के हित में निर्णय देते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने पत्नी को दिए जाने वाले अंतरिम भरण-पोषण की राशि को ढाई हजार रुपये से बढ़ाकर तीन हजार पांच सौ रुपये प्रतिमाह कर दिया। यह राशि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अंतर्गत आवेदन दायर किए जाने की तिथि से देय होगी और पहले से भुगतान की गई किसी भी राशि का समायोजन किया जाएगा।

