विदेश यात्रा रोकने से गर्भवती अफगान महिला के इलाज में बाधा न आए, दिल्ली हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश
Amir Ahmad
26 Sept 2026 12:48 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने जुड़वा बच्चों से गर्भवती अफगान नागरिक की ब्रिटेन यात्रा की अनुमति देने से इनकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि यात्रा पर रोक उसके और गर्भस्थ बच्चों के जरूरी चिकित्सकीय उपचार में बाधा न बने। महिला गर्भावस्था के दौरान मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से भी जूझ रही है।
जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि महिला के जुड़वा गर्भ और मेडिकल जटिलताओं को देखते हुए यात्रा की अनुमति न देने का फैसला उसके और गर्भस्थ बच्चों के जरूरी इलाज में रुकावट नहीं बनना चाहिए। अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जांच के कारण महिला के उचित चिकित्सकीय उपचार में देरी या बाधा न हो।
अदालत ने कहा कि यदि महिला दिल्ली के किसी सरकारी उच्चस्तरीय अस्पताल में उपचार कराना चाहती है तो राज्य सरकार उसे तत्काल आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराए। साथ ही जांच अधिकारी के समक्ष उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखते हुए ही कराई जाए। जब तक जांच के लिए तत्काल आवश्यकता न हो, उसे पर्याप्त पूर्व सूचना देकर ही बुलाया जाए।
महिला ने आपराधिक मामले की जांच लंबित होने के दौरान ब्रिटेन जाने की अनुमति मांगी थी। हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज की, लेकिन जांच एजेंसी को लंबित जांच जल्द-से-जल्द पूरी करने का हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया।
महिला ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसका मूल ब्रिटिश यात्रा दस्तावेज लौटाने और ब्रिटेन जाने की अनुमति देने से इनकार किया गया। उसके पास ब्रिटेन के गृह कार्यालय द्वारा जारी यात्रा दस्तावेज है और उसे अक्टूबर 2029 तक ब्रिटेन में रहने की अनुमति प्राप्त है।
महिला को एक FIR के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसने जाली भारतीय दस्तावेजों के आधार पर “ज्योति चावला” की पहचान से भारतीय पासपोर्ट हासिल किया और अगस्त 2023 में उसी पासपोर्ट से भारत से बाहर यात्रा की।
गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उसे गर्भावस्था और मधुमेह सहित मेडिकल कारणों से जमानत मिल गई। हालांकि जमानत की एक शर्त के तहत अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर जाने पर रोक लगाई गई।
महिला ने अदालत को बताया कि वह कृत्रिम गर्भाधान के जरिए ठहरे जुड़वा बच्चों से गर्भवती है और उसे गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह तथा थायरॉयड संबंधी बीमारी है। अभिलेखों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान उसे अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा था। उसके वकील ने कहा कि ब्रिटेन जाने का उद्देश्य वहीं प्रसव और प्रसव के बाद का उपचार कराना है, क्योंकि वह सामान्य रूप से वहीं रहती है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यात्रा की अनुमति से इनकार का आधार महिला की अफगान नागरिकता नहीं है। इसी तरह केवल ब्रिटेन में उसके वैध और स्थायी निवास को भी उसके खिलाफ निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि इस मामले में वास्तविक चिंता परिस्थितियों के पूरे संयोजन को लेकर है।
अदालत ने कहा कि कथित रूप से जाली दस्तावेज हासिल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है और अब तक जुटाई गई सामग्री प्रथमदृष्टया अभियोजन के इस आशंका को पूरी तरह काल्पनिक नहीं बनाती कि महिला के विदेश जाने के बाद उसकी भारत में वापसी सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।
हालांकि, खंडपीठ ने साफ किया कि महिला को निर्दोष मानने की कानूनी धारणा बनी हुई। अदालत ने कहा कि उसके आदेश का यह अर्थ नहीं है कि पासपोर्ट उसी ने जाली बनाया या अभियोजन का मामला साबित हो चुका है। इन सवालों का फैसला जांच और आरोपपत्र दाखिल होने पर मुकदमे के दौरान होगा।
अदालत ने कहा कि महिला के ब्रिटेन लौट जाने के बाद उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करना आपराधिक अदालत के तत्काल नियंत्रण में पूरी तरह नहीं रहेगा। इसलिए उसके भारत वापस न लौटने की आशंका को इस चरण पर पूरी तरह दूर या काल्पनिक नहीं माना जा सकता।
महिला ने अपनी वापसी सुनिश्चित करने के लिए सावधि जमा रसीद देने की पेशकश भी की थी। हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि आर्थिक जमानत से वापस न लौटने की स्थिति में वित्तीय परिणाम तो जुड़े हो सकते हैं, लेकिन भारत के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के बाद आरोपी की शारीरिक मौजूदगी सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल विदेश यात्रा की अनुमति न देने का मतलब यह नहीं है कि यात्रा दस्तावेज को अनिश्चितकाल तक रोके रखा जा सकता है। जांच पूरी होने या दस्तावेज की जांच के लिए जरूरत समाप्त होने के बाद महिला सक्षम अदालत के समक्ष उसे वापस पाने की मांग कर सकती है, जिस पर कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से विचार किया जाएगा।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की।

