अतिक्रमणकारियों को सार्वजनिक हित के आगे झुकना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी
Amir Ahmad
10 April 2026 4:14 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने वालों के निजी हित, बड़े सार्वजनिक हित के सामने टिक नहीं सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सड़क का विस्तार जरूरी है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना को मंजूरी देते हुए कहा कि अस्पताल, स्कूल और आपातकालीन सेवाओं तक सुगम पहुंच के लिए इस परियोजना में देरी नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा,
“ऐसी आधारभूत परियोजनाओं में देरी करना क्षेत्र के निवासियों के व्यापक हित के खिलाफ होगा।”
साथ ही यह भी जोड़ा,
“सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करने वाले निजी व्यक्तियों के हित, बड़े सार्वजनिक हित के सामने झुकने चाहिए।”
यह याचिका सरोज नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई, जिसमें हैदरपुर गांव के करीब 98 लोगों की ओर से दावा किया गया कि वे दशकों से उस भूमि पर रह रहे हैं और उनके पास बिजली बिल, कर रसीद और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज हैं।
हालांकि, अदालत ने पाया कि यह भूमि 1960 के दशक में ही विकास के लिए अधिग्रहित की जा चुकी थी और अधिकांश लोगों के पास वैध स्वामित्व के दस्तावेज नहीं हैं। कई मामलों में केवल सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के आधार पर कब्जा बताया गया, जो स्वामित्व साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि संबंधित भूमि के पास रेलवे लाइन है, जिसके कारण सड़क का विस्तार दूसरी दिशा में संभव नहीं है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण को रोकने का कोई विकल्प नहीं बचता।
हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को 30 मई 2026 तक का समय दिया है ताकि वे अपना सामान हटाकर स्थान खाली कर दें। इसके बाद प्रशासन को अतिक्रमण हटाकर सड़क निर्माण शुरू करने की अनुमति होगी।
साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) देने के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए।
इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि शहरी विकास और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से रोका नहीं जा सकता।

