अंकिता भंडारी हत्याकांड से दुष्यंत गौतम को जोड़ने वाली सामग्री हटाने के आदेश, कांग्रेस और AAP पर हाइकोर्ट सख्त

Amir Ahmad

7 Jan 2026 3:05 PM IST

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड से दुष्यंत गौतम को जोड़ने वाली सामग्री हटाने के आदेश, कांग्रेस और AAP पर हाइकोर्ट सख्त

    दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत कुमार गौतम को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाली कथित मानहानिकारक सामग्री को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य प्रतिवादियों को कड़ा निर्देश दिया।

    न्यायालय ने इन सभी को सोशल मीडिया से ऐसी सभी पोस्ट वीडियो और प्रकाशन हटाने का आदेश दिया।

    जस्टिस मिनी पुष्करणा ने मामले की सुनवाई के बाद आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रतिवादी दुष्यंत गौतम को अंकिता भंडारी हत्याकांड में तथाकथित 'विशेष व्यक्ति' बताकर नाम लेने या निशाना बनाने वाली किसी भी सामग्री का प्रकाशन या प्रसार नहीं करेंगे।

    न्यायालय ने प्रथम दृष्टया गौतम के पक्ष में मामला बनता हुआ पाते हुए कहा कि यदि ऐसी सामग्री पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।

    न्यायालय ने कांग्रेस पार्टी, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति, आम आदमी पार्टी, उर्मिला सनावर, सुरेश राठौर सहित अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे मंचों से संबंधित पोस्ट और वीडियो हटाएं।

    साथ ही कहा गया कि यदि 24 घंटे के भीतर इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो सोशल मीडिया मंचों को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत सामग्री हटाने के लिए बाध्य किया जाएगा।

    न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इसी प्रकार की कोई अन्य समान सामग्री सामने आती है, तो वादी सोशल मीडिया मंचों को उसकी सूचना दे सकते हैं और आवश्यक होने पर न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

    दुष्यंत गौतम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल और लाखों अनुयायियों वाले व्यक्तियों द्वारा बिना किसी आधार के लगाए गए आरोपों से गौतम की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है।

    उन्होंने कहा कि न तो FIR में और न ही जांच रिकॉर्ड में कहीं भी गौतम का नाम है, इसके बावजूद उन्हें जानबूझकर बदनाम किया गया।

    भाटिया ने यह भी कहा कि उर्मिला सनावर द्वारा साझा किए गए वीडियो और बयानों में यह संकेत देने की कोशिश की गई कि अंकिता भंडारी से कथित 'विशेष सेवा' की मांग गौतम के लिए की जा रही थी और इसी कारण उसकी हत्या की गई। उन्होंने इसे पूरी तरह निराधार, अश्लील और मानहानिकारक बताया।

    कांग्रेस और आम आदमी पार्टी द्वारा साझा की गई सामग्री का उल्लेख करते हुए सीनियर एडवोकेट ने कहा कि सत्यापन किए बिना प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाए गए, जिससे लाखों लोगों तक झूठी जानकारी पहुंची।

    उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण था तो उसे कानून के अनुसार शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी।

    सोशल मीडिया मंच की ओर से पेश वकील ने न्यायालय को बताया कि वे विवाद का पक्ष नहीं ले रहे हैं और न्यायालय के आदेशों का पालन करेंगे, हालांकि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने का अनुरोध किया।

    गौरतलब है कि अंकिता भंडारी वर्ष 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में लापता हुई थी, जिसके बाद उसकी हत्या का खुलासा हुआ। मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए निचली अदालत ने वर्ष 2025 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

    दुष्यंत गौतम का कहना है कि इस मामले से उनका कोई संबंध नहीं है और उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए झूठे तरीके से जोड़ा गया।

    दुष्यंत गौतम ने न्यायालय से मानहानिकारक सामग्री हटाने के साथ-साथ दो करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।

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