Delhi SIR: 'पहली बार मतदाता' घोषणा के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार, कहा- जनहित याचिका दाखिल करें

Amir Ahmad

10 Sept 2026 3:21 PM IST

  • Delhi SIR: पहली बार मतदाता घोषणा के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार, कहा- जनहित याचिका दाखिल करें

    दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए मतदाताओं से आवेदन पत्र में खुद को पहली बार मतदाता बताने वाली घोषणा लेने की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।

    जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि यह मामला जनहित याचिका के तौर पर दाखिल किया जाना चाहिए। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने याचिका वापस ले ली।

    याचिका दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक देवेंद्र यादव तथा डीपीसीसी बूथ प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार गर्ग ने दाखिल की।

    याचिका में फॉर्म-6 के पैरा (iii) और उसके साथ दिए जाने वाले घोषणा पत्र के पैरा (ii) को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया कि ये प्रावधान उन मतदाताओं पर लागू किए जा रहे हैं, जिनके नाम पहले मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन SIR से पहले की प्रक्रिया में हटा दिए गए या मौजूदा SIR के दौरान हटाए जा रहे हैं।

    याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ऐसे मतदाताओं को 'पहली बार मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने' की घोषणा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि उनके नाम पहले ही मतदाता सूची में रह चुके हैं। इसलिए यह घोषणा तथ्यात्मक रूप से गलत होगी।

    फॉर्म-6 में आवेदक से यह घोषणा ली जाती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है और उसका नाम किसी विधानसभा या लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है।

    याचिका में कहा गया कि यह घोषणा वास्तव में पहली बार मतदाता बनने वाले व्यक्ति के लिए उचित है, लेकिन उस व्यक्ति के लिए नहीं जिसका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था और SIR से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान हटा दिया गया।

    याचिकाकर्ताओं के अनुसार SIR प्रक्रिया के दौरान कई मतदाताओं को गणना फॉर्म नहीं मिले। उन्हें बूथ लेवल अधिकारियों की ओर से बताया गया कि अनुपस्थित रहने या निवास स्थान बदलने के कारण उनके नाम SIR से पहले की प्रक्रिया में हटा दिए गए। कुछ अन्य मतदाताओं, जिनके नाम स्थिर की गई मतदाता सूची में मौजूद थे को भी इसी तरह नाम हटाए जाने की जानकारी दी गई।

    याचिका में दावा किया गया कि पहले से मतदाता सूची में शामिल रहे लोगों से इस तरह की घोषणा लेना स्पष्ट रूप से गलत है। याचिकाकर्ताओं ने इसे निर्वाचन आयोग के अपने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संविधान के विपरीत बताया।

    याचिका में यह भी कहा गया कि गलत घोषणा करने के लिए मजबूर किए जाने से वास्तविक मतदाताओं को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मुकदमे का खतरा पैदा हो सकता है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।

    याचिकाकर्ताओं ने फॉर्म-6 और घोषणा पत्र के संबंधित हिस्सों को उन मतदाताओं पर लागू करने से रद्द करने की मांग की, जिनके नाम SIR से पहले या SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए।

    इसके अलावा, निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दोनों प्रपत्रों में उचित बदलाव करने का निर्देश देने की मांग की गई, ताकि पहले से पंजीकृत मतदाता अपने नाम बहाल कराने के लिए सही तथ्य के आधार पर घोषणा कर सकें।

    याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि SIR से पहले या SIR के दौरान नाम हटने के बाद फॉर्म-6 दाखिल करने वाले मतदाताओं के खिलाफ मौजूदा प्रपत्र में की गई घोषणा के आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत मुकदमा न चलाया जाए।

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