दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: अदालत परिसर के बाहर भी बनाया जा सकता है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए 'कोर्ट पॉइंट'

  • दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: अदालत परिसर के बाहर भी बनाया जा सकता है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए कोर्ट पॉइंट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायिक कार्यवाही करने के लिए निर्धारित 'कोर्ट पॉइंट' का अदालत परिसर के भीतर होना जरूरी नहीं है। अदालत के निर्देश पर किसी अन्य स्थान को भी कोर्ट पॉइंट के रूप में निर्धारित किया जा सकता है।

    जस्टिस तेजस करिया ने यह टिप्पणी गेम्सॉफ्ट कॉरपोरेशन की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए की। कंपनी ने अमेरिका के फ्लोरिडा में रहने वाले अपने दो गवाहों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिरह कराने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। इसके लिए दिल्ली हाईकोर्ट के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2025 के तहत अनुमति मांगी गई।

    मामले में कंपनी ने बताया कि फ्लोरिडा और भारत के समय में साढ़े नौ घंटे का अंतर है। ऐसे में गवाहों की जिरह के लिए कोर्ट पॉइंट और रिमोट पॉइंट निर्धारित करना आवश्यक है।

    हाईकोर्ट ने वर्ष 2025 के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों में कोर्ट पॉइंट और रिमोट पॉइंट की परिभाषाओं पर विचार किया। कोर्ट पॉइंट वह अदालत कक्ष या स्थान है, जहां अदालत भौतिक रूप से बैठती है। इसमें वह स्थान भी शामिल है, जहां अदालत के निर्देश पर कोर्ट कमिश्नर या जांच अधिकारी कार्यवाही करता है। वहीं, रिमोट पॉइंट वह स्थान है, जहां किसी व्यक्ति को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होना होता है।

    जस्टिस करिया ने कहा कि कोर्ट पॉइंट का हाईकोर्ट परिसर में स्थित होना अनिवार्य नहीं है। इसी तरह रिमोट पॉइंट भी कोई ऐसा स्थान हो सकता है, जिसे अदालत निर्धारित करे।

    इस व्याख्या के आधार पर हाईकोर्ट ने ओबेरॉय होटल को कोर्ट पॉइंट निर्धारित किया, जहां से कोर्ट कमिश्नर गवाहों की जिरह की कार्यवाही संचालित करेंगे। वहीं, फ्लोरिडा स्थित कंपनी के कार्यालय को रिमोट पॉइंट बनाया गया, जहां से दोनों गवाह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होंगे। अदालत ने कंपनी को कोर्ट पॉइंट के लिए होटल की बुकिंग का खर्च उठाने का निर्देश दिया।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने फ्लोरिडा में कार्यरत किसी नोटरी पब्लिक को रिमोट पॉइंट समन्वयक नियुक्त करने की कंपनी की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों के नियम 9(4) का हवाला देते हुए कहा कि विदेश में स्थित किसी व्यक्ति के लिए रिमोट पॉइंट समन्वयक के रूप में केवल भारतीय वाणिज्य दूतावास, भारतीय दूतावास या भारत के उच्चायोग के अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है।

    इसलिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि निर्धारित तारीख और समय पर फ्लोरिडा स्थित रिमोट पॉइंट पर भारतीय वाणिज्य दूतावास, अटलांटा का अधिकारी मौजूद रहे, ताकि गवाहों की जिरह की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके।

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