जहां आदेश पारित हुआ, वहीं उत्पन्न होता है आंशिक कारण: दिल्ली हाईकोर्ट ने PNB मामले में बहाल की याचिका
Amir Ahmad
9 April 2026 12:09 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी मामले में कॉज ऑफ एक्शन उस स्थान पर भी उत्पन्न होता है, जहां विवादित आदेश पारित किया गया हो। इसी आधार पर अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े एक मामले में याचिका फिर से बहाल की।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सिंगल जज का आदेश रद्द किया, जिसमें क्षेत्राधिकार के आधार पर याचिका सुनने से इनकार कर दिया गया।
मामला एक पूर्व बैंक कर्मचारी से जुड़ा था जिसे वर्ष 2013 में सेवा से हटा दिया गया। उसने पेंशन से संबंधित लाभ के लिए पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख किया था। वहां उसकी पेंशन की मांग खारिज की गई लेकिन उसे कम्पैशनेट अलाउंस के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई।
इसके बाद कर्मचारी ने आवेदन किया जिसे पंजाब नेशनल बैंक के सक्षम प्राधिकारी ने 25 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में आदेश पारित कर खारिज किया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए कर्मचारी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन सिंगल जज ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि यह आदेश गुवाहाटी हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पारित हुआ है। इसलिए वहीं चुनौती दी जानी चाहिए।
हालांकि, खंडपीठ ने इस तर्क से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि चूंकि विवादित आदेश नई दिल्ली स्थित प्राधिकरण द्वारा पारित किया गया, इसलिए इसका एक हिस्सा दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अदालत ने कहा,
“भले ही यह आदेश गुवाहाटी हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पारित किया गया हो, लेकिन इसे नई दिल्ली में पारित किया गया, इसलिए याचिकाकर्ता को इसे दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती देने का अधिकार है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नहीं कहा जा सकता कि इस मामले में कॉज ऑफ एक्शन दिल्ली में उत्पन्न नहीं हुआ।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सिंगल जज का आदेश रद्द करते हुए याचिका फिर से बहाल की ताकि मामले की सुनवाई उसके गुण-दोष के आधार पर की जा सके।

