बीते मुद्दों को बेवजह उखाड़ने की कोशिश: 46 साल पुराने वक्फ नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Amir Ahmad

24 Feb 2026 4:24 PM IST

  • बीते मुद्दों को बेवजह उखाड़ने की कोशिश: 46 साल पुराने वक्फ नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

    दिल्ली हाईकोर्ट ने जहांगीरपुरी क्षेत्र की कुछ मस्जिदों को वक्फ संपत्ति घोषित करने संबंधी 46 वर्ष पुराने नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज की।

    अदालत ने कहा कि यह बीते मुद्दों को बेवजह फिर से उखाड़ने की कोशिश है और दशकों बाद निपट चुके विषयों को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि मुस्लिम वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 6(1) के प्रावधान के अनुसार, धारा 5(2) के तहत वक्फ संपत्तियों की सूची प्रकाशित होने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के बाद सिविल कोर्ट में कोई वाद दायर नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने कहा,

    “जब अधिनियम 1954 की धारा 6(1) के प्रावधान के तहत सामान्य सिविल उपाय एक वर्ष के बाद प्रतिबंधित है, तब 46 वर्ष बाद रिट याचिका के माध्यम से यह घोषित करने की मांग करना कि अधिसूचना में दर्ज संपत्तियां वक्फ नहीं हैं, विधि सम्मत नहीं कहा जा सकता।”

    याचिकाकर्ता ने क्रम संख्या 26, 27 और 29 पर दर्ज सुन्नी वक्फ संपत्तियों को चुनौती दी थी, जिनमें (i) जामा मस्जिद, जहांगीरपुरी, (ii) मोती मस्जिद, जहांगीरपुरी, और (iii) मस्जिद जहांगीरपुरी शामिल हैं।

    वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि वर्ष 1980 में जारी अधिसूचना को लगभग 46 वर्ष बाद चुनौती देना विधिसम्मत नहीं है।

    अदालत ने इस आपत्ति से सहमति जताते हुए कहा कि इतने पुराने नोटिफिकेशन को कमजोर आधारों पर चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    मेरिट के आधार पर भी अदालत ने पाया कि विवादित अधिसूचना वक्फ आयुक्त द्वारा अधिनियम की धारा 4(3) के तहत की गई वैधानिक जांच के बाद जारी की गई।

    राज्य सरकार को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के परीक्षण के बाद ही वक्फ संपत्तियों की सूची प्रकाशित की गई।

    अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता बार-बार जनहित याचिका के नाम पर याचिकाएं दायर करता प्रतीत होता है और उसे देश में जनहित याचिका की पवित्रता को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने जनहित याचिका खारिज की।

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