स्विस बैंक अकाउंट को लेकर विदेशी सरकार से मिली अप्रमाणित जानकारी पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
23 July 2025 1:10 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक करदाता के खिलाफ इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 276C, 276D और 277 के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह कार्यवाही केवल कुछ अप्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर शुरू की गई थी, जिनमें स्विट्ज़रलैंड के एक अघोषित बैंक खाते के होने का आरोप लगाया गया था।
जस्टिस नीना बंशल कृष्णा ने अपने फैसले में कहा,
“किसी तीसरे देश से मिली अप्रमाणित जानकारी के आधार पर बिना किसी ठोस साक्ष्य के, केवल अंदाजों और संदेहों के आधार पर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। धारा 276D के तहत आपराधिक आरोप लगाने के लिए मात्र अनुमान या कल्पना पर्याप्त नहीं है।”
याचिकाकर्ता ने आपराधिक शिकायतों को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि जिन आकलन आदेशों के आधार पर शिकायतें दायर की गईं, उन्हें इनकम टैक्स अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने पहले ही खारिज किया।
यह आकलन आदेश फ्रांस सरकार से प्राप्त जानकारी के आधार पर जारी किए गए थे, जो दोहरी कर बचाव संधि (DTAA) के तहत भारत सरकार को प्राप्त हुई थी। इस जानकारी में कहा गया था कि याचिकाकर्ता का HSBC प्राइवेट बैंक (स्विट्ज़रलैंड) में एक बैंक अकाउंट है।
याचिकाकर्ता ने इन आरोपों का खंडन किया लेकिन उनके खिलाफ आयकर विभाग ने अघोषित विदेशी खाते के आधार पर कर जोड़ किया और आपराधिक शिकायतें भी दर्ज की गईं।
बाद में ITAT ने यह कर जोड़ रद्द कर दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि अब मूल आधार ही समाप्त हो गया तो अभियोजन की कोई वजह नहीं बचती।
प्रत्युत्तर में विभाग ने कहा कि आयकर अधिनियम के तहत की गई कार्यवाही का परिणाम आपराधिक न्यायालय को बाध्य नहीं करता और आपराधिक न्यायालय को स्वतंत्र रूप से सबूतों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि यदि किसी व्यक्ति की आय से जुड़ी गड़बड़ी की विश्वसनीय जानकारी मिलती है तो विभाग को जांच करने का अधिकार है, लेकिन यह संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।
इस मामले में कोर्ट ने पाया कि जानकारी अप्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर थी और जब याचिकाकर्ता के यहां छापा मारा गया तो कोई भी ऐसा दस्तावेज नहीं मिला जिससे विदेशी बैंक अकाउंट सिद्ध हो सके।
इसलिए कोर्ट ने माना कि जब आय को छिपाने का कोई ठोस सबूत नहीं है तो यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता ने कोई धोखाधड़ी या आय छिपाई है।
अतः कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए आपराधिक शिकायतों को रद्द कर दिया।
केस टाइटल: अनुराग डालमिया बनाम इनकम टैक्स ऑफिस

