कोमा में सैनिक के शुक्राणु सुरक्षित रखने की अनुमति: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सहमति को माना पर्याप्त

Amir Ahmad

15 April 2026 5:29 PM IST

  • कोमा में सैनिक के शुक्राणु सुरक्षित रखने की अनुमति: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सहमति को माना पर्याप्त

    दिल्ली हाईकोर्ट ने संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसले में कोमा में पड़े सैनिक के शुक्राणु निकालकर संरक्षित (क्रायोप्रिजर्वेशन) करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि IVF प्रक्रिया के लिए पहले दी गई सहमति को ही वैध माना जाएगा।

    जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह आदेश देते हुए कहा कि केवल इस आधार पर पत्नी को अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि पति की वर्तमान लिखित सहमति उपलब्ध नहीं है।

    मामले में याचिकाकर्ता पत्नी ने अदालत से अनुरोध किया कि उसके पति, जो जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान गंभीर मस्तिष्क चोट के कारण कोमा में हैं के शुक्राणु सुरक्षित रखे जाएं ताकि वह IVF प्रक्रिया पूरी कर सके।

    अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि हादसे से पहले दंपति ने IVF उपचार शुरू किया था और इसके लिए सहमति भी दी थी। हालांकि, दुर्घटना के बाद पति की स्थिति ऐसी हो गई कि वह नई लिखित सहमति देने में असमर्थ हैं।

    अदालत ने माना कि पहले दी गई सहमति ही इस स्थिति में पर्याप्त है।

    अदालत ने कहा,

    “ऐसी परिस्थिति में पूर्व में दी गई सहमति को अमान्य मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे पूरी आईवीएफ प्रक्रिया का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।”

    हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया संबंधित कानूनों और चिकित्सा शर्तों के अधीन ही पूरी की जाएगी।

    अदालत ने प्रजनन अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए कहा कि कानून की व्याख्या इस प्रकार होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा हो, न कि उन्हें सीमित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि जीवन की परिस्थितियां अप्रत्याशित होती हैं और ऐसे मामलों में कठोर प्रक्रिया को लागू करना न्याय के मूल उद्देश्य के विपरीत होगा।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें और पत्नी को केवल इस आधार पर वंचित न करें कि पति की वर्तमान लिखित सहमति उपलब्ध नहीं है।

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