साकेत भवन हादसे पर जज को बताया 'हत्यारा': दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का दिया आदेश

Amir Ahmad

8 Jun 2026 6:26 PM IST

  • साकेत भवन हादसे पर जज को बताया हत्यारा: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का दिया आदेश

    दिल्ली हाईकोर्ट ने साकेत क्षेत्र में इमारत ढहने की घटना को लेकर मौजूदा हाएकोर्ट जज के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणियों को तत्काल हटाने का आदेश दिया।

    अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संबंधित वीडियो और पोस्ट हटाने के निर्देश देते हुए संकेत दिया कि संबंधित अकाउंट को भी अवरुद्ध करने संबंधी विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा।

    जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    याचिका में डॉ. कपिल काकर नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई, जो "ब्लैक जस्टिस" नामक मंच पर वीडियो साझा करता है।

    सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने अदालत को संबंधित वीडियो और पोस्ट की सामग्री से अवगत कराया।

    उन्होंने कहा कि काकर ने एक मौजूदा हाइकोर्ट जज के खिलाफ झूठे, अपमानजनक और अवमाननापूर्ण आरोप लगाए। वीडियो में जज को साकेत भवन हादसे में हुई मौतों का "वास्तविक अपराधी" और "हत्यारा" तक बताया गया।

    बताया गया कि एक वीडियो में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या भवन हादसे में हुई मौतों के लिए जज को जेल भेजा जाएगा या फांसी दी जाएगी।

    इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी सामग्री को तुरंत हटाया जाना चाहिए।

    खंडपीठ ने कहा,

    "इसे कैसे रोका जाए? मीडिया इतना शक्तिशाली हो गया। जब किसी मंच के संज्ञान में इतनी असंगत और आपत्तिजनक सामग्री आती है तो उसे हटाने में देरी क्यों होनी चाहिए? इस तरह की घटनाएं रोज हो रही हैं।"

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी अदालत से कहा कि यदि किसी मंच के संज्ञान में स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक सामग्री आती है तो उसे तत्काल हटाना उसकी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

    अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की सामग्री का उद्देश्य वास्तविक मुद्दा उठाना नहीं, बल्कि न्यायपालिका की छवि धूमिल करना प्रतीत होता है।

    खंडपीठ ने कहा,

    "यह सब केवल बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। हम केवल यही उम्मीद कर सकते हैं कि लोग ऐसी बातों पर ध्यान न दें।"

    मामले में उपस्थित सामाजिक माध्यम मंचों के वकीलों ने अदालत को आश्वस्त किया कि संबंधित लिंक हटाए जाएंगे और भविष्य में भी यदि ऐसे अन्य लिंक उनके संज्ञान में लाए जाते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

    हालांकि, सुनवाई के दौरान एक मंच की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।

    इसके बाद अदालत ने सभी संबंधित लिंक तत्काल हटाने का निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित खातों को अवरुद्ध करने संबंधी आदेश भी पारित किया जाएगा।

    Next Story