दिल्ली दंगे 2020 और जामिया हिंसा 2019 की SIT जांच की मांग वाली याचिकाओं पर 23 जनवरी को सुनवाई करेगा दिल्ली हाइकोर्ट
Amir Ahmad
14 Jan 2026 4:01 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और वर्ष 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच या विशेष जांच दल (SIT) से जांच की मांग करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर 23 जनवरी को सुनवाई तय की।
यह आदेश बुधवार, 14 जनवरी को पारित किया गया।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि ये मामले पहले ही एक समकक्ष पीठ के समक्ष आंशिक रूप से सुने जा चुके हैं।
हाइकोर्ट ने 11 दिसंबर, 2025 को पारित उस पूर्व आदेश का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया कि मामलों को “आगे की बहस” के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
खंडपीठ ने कहा कि न्यायिक शालीनता और प्रक्रिया की निरंतरता के मद्देनज़र इन याचिकाओं को उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना उचित होगा।
इसके साथ ही निर्देश दिया गया कि चीफ जस्टिस के आदेशों के अधीन इन मामलों को जस्टिस विवेक चौधरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष 23 जनवरी को सूचीबद्ध किया जाए।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित याचिकाओं में वर्ष 2020 में हुई हिंसा की स्वतंत्र SIT जांच, कथित भड़काऊ और नफरत भरे भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा कथित तौर पर लापरवाही या पक्षपात बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। ये याचिकाएं वर्ष 2020 में ही दाखिल की गई थीं।
इनमें से एक याचिका शेख मुजतबा द्वारा दायर की गई, जिसमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की गई।
एक अन्य याचिका 'लॉयर्स वॉयस' द्वारा दाखिल की गई, जिसमें कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई अन्य राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात की याचिका में दंगों के दौरान पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और अन्य राज्य कर्मियों द्वारा कथित अत्याचारों और आपराधिक कृत्यों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई। वहीं अजय गौतम द्वारा दायर याचिका में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के कथित वित्तपोषण और प्रायोजन की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की गई।
इन मामलों के संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि दिसंबर, 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाइकोर्ट से एक याचिका पर शीघ्र निर्णय देने का आग्रह किया था।
वर्ष 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई हिंसा से जुड़े मामलों में यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा याचिकाएं दाखिल की गई, जिनमें आरोप लगाया गया कि दिल्ली पुलिस द्वारा उनके खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया।
एक याचिकाकर्ता नबीला हसन ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की थी। दिल्ली पुलिस ने इन मामलों में कहा कि सभी संबंधित सीसीटीवी फुटेज समय पर एकत्र कर सुरक्षित रखे गए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी 19 अक्टूबर, 2023 को यह अनुरोध किया था कि दिल्ली हाइकोर्ट इन लंबित मामलों की शीघ्र सुनवाई करे, क्योंकि ये लंबे समय से विचाराधीन हैं।

