राणा अय्यूब के ट्वीट नहीं हटाने पर X को झटका, सुरक्षित छूट हो सकती है खत्म: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
Amir Ahmad
10 April 2026 4:23 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने बड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पत्रकार राणा अय्यूब के कथित आपत्तिजनक ट्वीट्स को न हटाने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' अपनी सेफ हार्बर यानी कानूनी संरक्षण खो सकता है। केंद्र ने अदालत को बताया कि न्यायिक आदेश और पुलिस नोटिस के बावजूद सामग्री न हटाना कानून के उल्लंघन के समान है।
जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव के समक्ष दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि जब किसी मंच को अवैध सामग्री की वास्तविक जानकारी मिल जाती है तब उसे तुरंत कार्रवाई करनी होती है। ऐसा न करना नियमों के तहत आवश्यक सावधानी का पालन न करना है।
सरकार ने कहा,
“ऐसी निष्क्रियता नियमों के तहत निर्धारित दायित्वों का उल्लंघन है। इसके परिणामस्वरूप मध्यस्थ को मिलने वाला संरक्षण वापस लिया जा सकता है।”
मामला अमिता सचदेवा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें राणा अय्यूब के कुछ पुराने ट्वीट्स को हटाने की मांग की गई। याचिका में आरोप है कि ये ट्वीट्स धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले, भड़काऊ और साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील हैं।
दूसरी ओर X ने अदालत में कहा कि उसके खिलाफ याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि वह संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य नहीं है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि ट्वीट्स की वैधता तय करना हाईकोर्ट का विषय नहीं, बल्कि इसके लिए दीवानी मुकदमा दायर किया जाना चाहिए।
X ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए सामग्री को अवरुद्ध करने का आदेश जारी करे या फिर सीधे मूल पोस्ट करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करे।
केंद्र ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस ने 9 अप्रैल को संबंधित ट्वीट्स को ब्लॉक करने का अनुरोध भेजा है, जिस पर नियमों के तहत विचार किया जा रहा है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि कथित रूप से आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री के मामले में कार्रवाई आवश्यक है। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट के आदेश पर पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
हाईकोर्ट ने फिलहाल दिल्ली पुलिस को अंतरिम आदेश का पालन करने को कहा और राणा अय्यूब को याचिका पर जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।
मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित ट्वीट्स में न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सेना की छवि को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। वहीं यह भी कहा गया कि सभी कानूनी उपाय अपनाने के बावजूद ये ट्वीट्स अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जिससे लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है।

