हाईकोर्ट ने पार्क में रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने से किया इनकार, कहा- हरियाली बनाए रखने से पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी मदद

  • हाईकोर्ट ने पार्क में रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने से किया इनकार, कहा- हरियाली बनाए रखने से पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी मदद

    दिल्ली हाईकोर्ट ने नारायणा स्थित चिंटू पार्क में वार्षिक रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि पार्क को खुले आसमान के नीचे रखते हुए वहां हरियाली बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण में मददगार होगा।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने श्री सनातन धर्म रामलीला समिति की अपील खारिज की। समिति ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें संबंधित जमीन को हरित क्षेत्र के रूप में बनाए रखने का निर्देश दिया गया।

    समिति ने 19 अगस्त के आदेश में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि वह पिछले 53 वर्षों से लगातार इसी परिसर में रामलीला का आयोजन करती आ रही है। उसके मुताबिक, इतने लंबे समय से इस जमीन का इस्तेमाल किए जाने के कारण उसे यह उचित अपेक्षा थी कि भविष्य में भी वार्षिक आयोजन की अनुमति मिलती रहेगी।

    समिति ने यह भी कहा कि वह जमीन को पहले जैसी स्थिति में बहाल करने का लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है। इसमें हरित पौधों को दोबारा स्थापित करना और यह सुनिश्चित करना शामिल था कि पार्क को कोई नुकसान न पहुंचे।

    दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने समिति की मांग का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बाद जमीन को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया। इसके सुधार पर सरकारी धन की बड़ी राशि खर्च की गई। DDA के अनुसार, वहां फिर से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने से क्षेत्र को दोबारा नुकसान पहुंच सकता है। प्राधिकरण ने यह भी कहा कि समिति को किसी विशेष उद्देश्य के लिए जमीन का लगातार या स्थायी रूप से इस्तेमाल करने का पूर्ण अधिकार नहीं है।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिंगल जज ने संबंधित अधिकारियों को जमीन को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने और उसका उचित रखरखाव करने का निर्देश दिया था। खंडपीठ ने अदालत में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट और तस्वीरों पर भी गौर किया, जिनसे पता चलता है कि क्षेत्र को हरित बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

    कोर्ट ने कहा कि तस्वीरें दर्शाती हैं कि जमीन को हरित क्षेत्र में बदलने और उसके रखरखाव के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस काम पर पहले ही सरकारी धन की बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है।

    खंडपीठ ने समिति की ओर से उद्धृत साहिल विकलांग सहायता समिति बनाम दिल्ली विकास प्राधिकरण मामले के फैसले को भी अलग माना। कोर्ट ने कहा कि उस मामले में संबंधित जमीन का क्षेत्रफल 2,50,000 वर्ग मीटर था और उसके एक हिस्से में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई। इसके विपरीत, चिंटू पार्क का क्षेत्रफल केवल 9,000 वर्ग मीटर है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि चिंटू पार्क को खुले आसमान के नीचे रखना और वहां हरियाली बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण तथा हरित क्रांति की भावना के अनुरूप होगा।

    खंडपीठ को अपीलीय अधिकार क्षेत्र में एकल जज के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला। इसके बाद कोर्ट ने समिति की अपील खारिज की।

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story