धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ पूर्व विधायक की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस

Amir Ahmad

7 April 2026 3:13 PM IST

  • धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ पूर्व विधायक की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस

    दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने धोखाधड़ी के मामले में अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी है।

    जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की पीठ ने इस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। याचिका में भारती ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई तीन साल की सजा को भी चुनौती दी।

    दोषसिद्धि के बाद हाल ही में भारती को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। दतिया सीट से उनकी सदस्यता समाप्त करने का नोटिफिकेशन भी जारी किया गया।

    मामले के अनुसार, वर्ष 2015 में जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, दतिया ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष रहते हुए भारती ने अधिकारियों पर दबाव डालकर 10 लाख रुपये की सावधि जमा (एफडी) की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करवाई।

    अभियोजन के अनुसार, ऐसा एक ट्रस्ट को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया ताकि उसे 13.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर अतिरिक्त 12 वर्षों तक लाभ मिलता रहे।

    ट्रायल कोर्ट ने 1 अप्रैल को भारती को दोषी ठहराया और 2 अप्रैल को उन्हें तीन साल की सजा सुनाई। साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इस मामले में पूर्व कैशियर रघुवीर शरण प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया।

    दोनों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग जैसे आरोपों में दोषी पाया गया।

    अदालत ने यह दलील भी खारिज की थी कि वे सरकारी अधिकारी होने के कारण बिना सरकारी अनुमति के उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती।

    ट्रायल कोर्ट ने स्पष्ट कहा था,

    “धोखाधड़ी और जालसाजी कर्तव्य का पालन नहीं बल्कि कर्तव्य की अवहेलना है।”

    अदालत ने यह भी माना कि आरोपियों ने मिलकर बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रची और तय अवधि के बाद भी अधिक ब्याज दर पर लाभ उठाया।

    राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को भी अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि यह मामला 1998 से 2011 के बीच बैंक से जुड़े लेन-देन में गड़बड़ी का है, जिसका किसी राजनीतिक विवाद से संबंध नहीं है।

    अब इस मामले में आगे की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में होगी।

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