विदेश में रह रहे आरोपी को भगोड़ा घोषित करना गलत: हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC रद्द की
Amir Ahmad
26 March 2026 11:41 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक व्यक्ति के खिलाफ जारी प्रोक्लेमेशन आदेश और लुकआउट सर्कुलर (LOC) रद्द किया।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने विदेश में रह रहे आरोपी को समन भेजने का कोई ठोस प्रयास ही नहीं किया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,
“जब जांच एजेंसी को पता था कि आरोपी ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, तब भी वहां उसके पते पर समन या वारंट भेजने की कोई कोशिश नहीं की गई। विदेश मंत्रालय या अन्य वैधानिक माध्यमों से भी सेवा कराने का प्रयास नहीं हुआ।”
हाईकोर्ट ने पाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धाराओं 82 और 83 के तहत शुरू की गई कार्यवाही त्रुटिपूर्ण थी, क्योंकि आरोपी को उसके ज्ञात विदेशी पते पर नोटिस देने की कोशिश ही नहीं की गई।
मामला 2019 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को घोषित व्यक्ति (प्रोक्लेम्ड पर्सन) घोषित कर दिया था और उसके खिलाफ LOC जारी की गई। उस पर गंभीर आरोपों में FIR दर्ज थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह मार्च 2018 से ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है और पुलिस को उसका विदेशी पता भी मालूम था। फिर भी नोटिस केवल दिल्ली के पते पर भेजे जाते रहे।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि मजिस्ट्रेट को यह बताया गया कि आरोपी विदेश में रह रहा है और उसका पता पुलिस के पास उपलब्ध था।
हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि आरोपी जांच एजेंसी के संपर्क में था और निर्देशों का पालन कर रहा था।
अदालत ने कहा,
“जो व्यक्ति लगातार जांच एजेंसी के संपर्क में है, उसे सामान्य रूप से फरार या कानून से बचने वाला नहीं माना जा सकता।”
अदालत ने यह भी कहा कि एजेंसी ने आरोपी को प्रोक्लेमेशन कार्यवाही की जानकारी नहीं दी, जबकि वह नियमित संपर्क में था जिससे याचिकाकर्ता का पक्ष मजबूत होता है।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC को निरस्त कर दिया। यह फैसला बताता है कि विदेश में रहने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया का सही पालन करना अनिवार्य है।

