बालिग होने पर पीड़िता से निकाह करना बलात्कार के अपराध को खत्म नहीं करता: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

14 April 2026 4:28 PM IST

  • बालिग होने पर पीड़िता से निकाह करना बलात्कार के अपराध को खत्म नहीं करता: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि यदि किसी अभियुक्त ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार जैसा जघन्य अपराध किया है तो लड़की के बालिग होने के बाद उससे शादी या निकाह कर लेने से अभियुक्त का आपराधिक दायित्व समाप्त नहीं हो जाता।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि बाद में की गई शादी उस समय किए गए अपराध को नहीं मिटा सकती, जब पीड़िता नाबालिग है।

    भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत दर्ज मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कड़ी टिप्पणी की।

    उन्होंने कहा,

    "बेशक रिकॉर्ड के अनुसार 12 फरवरी, 2026 को अभियुक्त ने पीड़िता के साथ निकाह किया। हालांकि, यह अभियुक्त को बलात्कार के उन बार-बार किए गए कृत्यों से मुक्त नहीं करता, जो तब किए गए, जब पीड़िता नाबालिग थी।"

    अदालत ने यह भी गौर किया कि अभियुक्त ने शादी के लिए तभी सहमति दी, जब वह गिरफ्तार होकर जेल पहुंच गया। जस्टिस ने इसे जमानत पाने का एक हथकंडा करार दिया।

    मामला

    अभियोजन पक्ष के अनुसार अभियुक्त ने पीड़िता के साथ तब संबंध बनाए, जब उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष थी। शादी का झांसा देकर उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए गए, जिसके कारण वह दो बार गर्भवती हुई और अभियुक्त के कहने पर उसे गर्भपात कराना पड़ा।

    सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पीड़िता (जो अब बालिग है) मुकदमे के दौरान अपने पहले के बयानों से मुकर गई। हालांकि, कोर्ट ने इस पर संदेह जताते हुए कहा कि पीड़िता कानून की छात्रा है।

    अदालत ने कहा,

    "पीड़िता कानून की छात्रा है और प्रथम दृष्टया यह मानना कठिन है कि वह इतनी भोली है कि बिना समझे इतनी गंभीर शिकायत पर हस्ताक्षर कर देगी या पुलिस को बयान दे देगी।"

    हाईकोर्ट ने FIR और धारा 164 के तहत दर्ज शुरुआती बयानों को गंभीर मानते हुए कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री अभियुक्त के खिलाफ गंभीर आरोपों का खुलासा करती है। अदालत ने इन दलीलों को खारिज किया कि शादी हो जाने के कारण अभियुक्त को रिहा कर देना चाहिए और उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज किया।

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