हर उपलब्धि से पर्सनैलिटी राइट नहीं बनता, अति-विस्तार से पैदा होगी विसंगति: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

5 May 2026 12:42 PM IST

  • हर उपलब्धि से पर्सनैलिटी राइट नहीं बनता, अति-विस्तार से पैदा होगी विसंगति: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्येक सफलता या उपलब्धि को पर्सनैलिटी राइट का दर्जा नहीं दिया जा सकता। अदालत ने चेताया कि यदि इस सिद्धांत का अत्यधिक विस्तार किया गया तो यह हास्यास्पद और अव्यावहारिक स्थिति पैदा करेगा।

    जस्टिस तुषार राव गेडेला ने यह टिप्पणी क्लैट 2026 टॉपर विवाद से जुड़े दो प्रतिस्पर्धी शिक्षा मंचों के बीच चल रहे वाणिज्यिक विवाद की सुनवाई के दौरान की।

    अदालत ने कहा,

    “यदि हर सफलता या उपलब्धि को पर्सनैलिटी राइट मान लिया जाए तो देश का हर स्टूडेंट, अभ्यर्थी या नागरिक जो किसी परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करे, वह पर्सनैलिटी राइट संरक्षण का दावा करने लगेगा।”

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी एक उपलब्धि के आधार पर सामान्यतः पर्सनैलिटी राइट का दावा नहीं किया जा सकता। हालांकि प्रत्येक मामला अपने तथ्यों के आधार पर अलग-अलग परखा जा सकता है।

    अदालत ने यह भी कहा कि लगातार वर्षों तक शीर्ष प्रदर्शन करने वाले, खेल जगत के पुरस्कार विजेता, ख्यातिप्राप्त कलाकार, वैश्विक स्तर पर पहचाने जाने वाले व्यवसायी, राजनीतिक या धार्मिक नेता जैसे व्यक्तियों के मामले अलग हो सकते हैं जहां पर्सनैलिटी राइट का प्रश्न उठ सकता है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित टॉपर को अपमानजनक सामग्री से संरक्षण दिया लेकिन स्पष्ट किया कि यह संरक्षण किसी कथित पर्सनैलिटी राइट के आधार पर नहीं दिया जा रहा है।

    हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को वादी कंपनी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोका तथा टॉपर के नाम, तस्वीर और उससे जुड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित या परिवर्तित सामग्री के उपयोग पर भी रोक लगाई।

    मामले में नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 24 अगस्त को तय की गई।

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