पासपोर्ट जब्ती जैसे मामलों में रिट याचिका सुनने से इनकार गलत: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
27 March 2026 4:54 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका को सुनने से इनकार करने के एकल पीठ का आदेश रद्द किया।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं, इसलिए याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
मामला उस आदेश से जुड़ा था जिसमें एकल जस्टिस ने याचिकाकर्ता को पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 11 के तहत वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए कहा था और रिट याचिका सुनने से मना कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो, लेकिन यह कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने व्हर्लपूल कॉरपोरेशन बनाम रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेड मार्क्स के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कुछ परिस्थितियों में रिट याचिका न सुनना गंभीर त्रुटि हो सकती है।
पीठ ने पाया कि पासपोर्ट जब्ती का अंतिम आदेश याचिकाकर्ता को जवाब देने के लिए दी गई समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही जारी कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता को 4 अगस्त तक जवाब देने का समय दिया गया था, जबकि आदेश 3 अगस्त को ही पारित कर दिया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि आदेश में याचिकाकर्ता के जवाब पर विचार किए जाने का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे यह प्रतीत होता है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।
पीठ ने कहा कि पासपोर्ट जब्ती जैसी कार्रवाई के गंभीर नागरिक प्रभाव होते हैं, इसलिए प्रक्रिया की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में अदालत ने मेनका गांधी बनाम भारत संघ के फैसले का भी उल्लेख किया।
अंततः हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि रिट याचिका पर पुनः सुनवाई की जाए।
इस फैसले से स्पष्ट हुआ कि जहां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हो और नागरिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़े, वहां हाइकोर्ट रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग करने से पीछे नहीं हट सकता।

